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आईएमए की ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड: देश को मिले 481 नए सैन्य अफसर, पहली बार 9 महिला अधिकारी बनीं सेना का गौरव

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 13, 2026 09:06 AM
IMA's historic passing-out parade: The nation gets 481 new military officers; for the first time, 9 female officers bring pride to the Army.

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून में शनिवार को आयोजित 158वीं पासिंग आउट परेड देश के सैन्य इतिहास में एक नए अध्याय की गवाह बनी। इस भव्य समारोह के साथ भारतीय सेना को 481 नए सैन्य अधिकारी मिले, जबकि 16 मित्र देशों के 34 कैडेट भी प्रशिक्षण पूरा कर सैन्य अधिकारी बने। इस बार की परेड की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि आईएमए के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट पास आउट होकर सैन्य अधिकारी बनीं।

सुबह पौने सात बजे से शुरू हुई परेड की औपचारिकताओं के बीच चैटवुड ग्राउंड पर सैन्य अनुशासन, जोश और गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। परेड की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू थीं, जिन्होंने विशेष ‘पटियाला कोच’ घोड़ा बग्गी से परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति के निरीक्षण के बाद कदमताल शुरू हुई और पूरे मैदान में देशभक्ति का माहौल छा गया। राष्ट्रपति ने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया। अकादमी के कैडेट विशाल कुमार ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और गोल्ड मेडल दोनों अपने नाम किए। उन्हें ‘बेस्ट अमंग ऑफिसर कैडेट्स’ का सम्मान भी मिला। इसके अलावा प्रिंस राज को सिल्वर मेडल, तेजस भट्ट को ब्रॉन्ज मेडल, हृषभ मिश्रा को टीजीसी सिल्वर मेडल, करण पांडेय को टीईएस सिल्वर मेडल तथा बोधराज थापा को एससीओ श्रेणी में गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। बांग्लादेश के कैडेट जैफ सादिद अल्वी को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट का सम्मान मिला, जबकि इंफाल कंपनी ने ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर’ जीतकर अकादमी में अपना परचम लहराया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में नव नियुक्त अधिकारियों को राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ कर्तव्य निभाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है और नए अधिकारी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। परेड का सबसे भावुक क्षण तब आया जब कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार किया। यह वह परंपरा है जो प्रशिक्षणार्थी से सैन्य अधिकारी बनने की यात्रा को पूर्ण करती है। अंतिम पग पार करते ही सभी कैडेट भारतीय सेना के अधिकारी बन गए। इस ऐतिहासिक पल को और यादगार बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से उन पर पुष्पवर्षा की गई। आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं, बल्कि देश के भविष्य के नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का उत्सव बन गई। पहली बार महिला अधिकारियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना दिया, जो भारतीय सेना में बढ़ती लैंगिक समानता और सशक्तिकरण का प्रतीक माना जा रहा है।


 


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