अयोध्या में खाकी और प्रशासन के सामने दबंगई: गरीब परिवार पर जुल्म! मारपीट के बाद घर उजाड़ा, गाड़ियां तोड़ीं! न्याय के लिए धरने पर बैठेगा पीड़ित परिवार
अयोध्या। अयोध्या के सराय रासी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए दबंगों ने एक गरीब गुप्ता परिवार पर कहर बरपाया। पीड़ित संजय गुप्ता और उनके परिवार का आरोप है कि क्षेत्र के रसूखदार भू-माफिया, जो पहले से ही सरकारी बंजर जमीन पर अवैध रूप से स्कूल संचालित कर रहे हैं, अब उनकी निजी भूमि और मकान पर कब्जा करने की फिराक में हैं। पीड़ित का कहना है कि दबंगों ने उनके घर की दीवार ढहा दी और वहां खड़ी मोटरसाइकिल व तीन पहिया गाड़ी में जमकर तोड़फोड़ की। विरोध करने पर परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी छीनकर तोड़ दिए गए, ताकि जुल्म की कोई तस्वीर या वीडियो न बन सके। सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरी बर्बरता डायल 112 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई, लेकिन अपराधियों को रोकने के बजाय प्रशासन मौन खड़ा रहा।
पीड़ित परिवार की मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं। संजय गुप्ता ने बताया कि जब वे पुलिस की मौजूदगी में मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे, तो वहां भी दबंगों ने उन्हें घेर लिया और अधिकारियों के सामने ही सरेआम जान से मारने की धमकी दी। पीड़ितों का कहना है कि चोट उन्हें लगी, संपत्ति का नुकसान उनका हुआ, लेकिन रसूख के दबाव में पुलिस ने उल्टा पीड़ित परिवार के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया है। घर की बेटियां इस कदर दहशत में हैं कि वे घर से बाहर कदम रखने में भी डर रही हैं। बेटियों ने शासन-प्रशासन से सवाल किया है कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के बड़े-बड़े दावों के बीच उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। परिवार ने अपनी ही बिरादरी के स्थानीय विधायक, जो स्वयं गुप्ता समाज से हैं, उनसे भी भावुक अपील की है कि वे अपने समाज के इस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे आएं। प्रशासनिक उपेक्षा और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई से आहत होकर अब पूरे परिवार ने न्याय के लिए गांधी पार्क में धरने पर बैठने का ऐलान किया है। पीड़ितों का कहना है कि दबंगों द्वारा लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनका पूरा परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर है। उन्होंने मांग की है कि उनकी जमीन सुरक्षित की जाए, उनके क्षतिग्रस्त सामान का हर्जाना दिलाया जाए और उन पर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं। अब देखना यह होगा कि रामनगरी का प्रशासन इस बेबस परिवार की चीख सुनता है या रसूखदारों के आगे नतमस्तक रहता है।