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चौबटिया की पहाड़ियों में गूंजी भारत-जापान की 'धर्म गार्जियन' हुंकार: चीन सीमा के करीब 240 जांबाज ले रहे सैन्य अभ्यास में हिस्सा,रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई धार

editor
  • Tapas Vishwas
  • February 26, 2026 12:02 PM
India-Japan's "Dharma Guardian" call resonates in the hills of Chaubatia: 240 bravehearts are participating in military exercises near the China border, strategic relations will gain a new edge.

उत्तराखंड की शांत वादियों और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अल्मोड़ा जिले के चौबटिया में भारत और जापान के बीच रक्षा संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। मंगलवार, 24 फरवरी से भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' (Dharma Guardian) के सातवें संस्करण का आगाज हो गया है। 9 मार्च 2026 तक चलने वाला यह दो सप्ताह का गहन सैन्य अभ्यास न केवल दोनों देशों के बीच तकनीकी तालमेल बढ़ाएगा, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच एक मजबूत रणनीतिक संदेश भी देगा।

चौबटिया स्थित 'फॉरेन ट्रेनिंग नोड' में आयोजित इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सैन्य कौशल का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। इस वर्ष के अभ्यास में भारतीय सेना की ओर से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में माहिर लद्दाख स्काउट्स के 120 जवान हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, जापान की ओर से जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स (JGSDF) की प्रतिष्ठित 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के 120 जांबाज अपनी युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुल 240 सैनिकों का यह दल अगले 14 दिनों तक कंधे से कंधा मिलाकर आधुनिक युद्ध कलाओं का अभ्यास करेगा। 'धर्म गार्जियन' के सातवें संस्करण का मुख्य फोकस अर्ध-शहरी (सेमी अर्बन) वातावरण में आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देना है। अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच 'इंटरऑपरेबिलिटी' यानी एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझना और संकट के समय प्रभावी ढंग से मिलकर काम करने की क्षमता विकसित करना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान का यह समन्वय क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वार्षिक अभ्यास बारी-बारी से भारत और जापान में आयोजित किया जाता है। चौबटिया में हो रहा यह सातवां संस्करण आधुनिक सैन्य तकनीक, ड्रोन के इस्तेमाल और साइबर सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी समेटे हुए है। उत्तराखंड की यह देवभूमि अब एक ऐसी 'रणभूमि' में तब्दील हो गई है, जहाँ से निकलने वाला सैन्य समन्वय का संदेश टोक्यो से लेकर दिल्ली तक गूंजेगा। जीएमवीएन और स्थानीय प्रशासन भी इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को लेकर सतर्क है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धाभ्यास भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। 9 मार्च को इस अभ्यास के समापन पर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी संयुक्त समीक्षा करेंगे, जो भविष्य के रक्षा सौदों और रणनीतिक समझौतों की नींव बनेगा।


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