ग्लोबल मैरीटाइम में भारत का डंका: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बना इंडिया,5 सालों में दोगुनी हुई हिस्सेदारी,फिलीपींस अब भी नंबर-1
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और मर्चेंट नेवी की दुनिया में भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। वैश्विक समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) की कुल संख्या में 12.2% हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया में नाविकों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर (आपूर्तिकर्ता) देश बन गया है। इस सूची में दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश फिलीपींस अभी भी पहले पायदान पर बना हुआ है।
वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीआईएमसीओ-आईसीएस सीफेयरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक (सीफेयरर) आपूर्तिकर्ता देश बन गया है। वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी अब 12.2 प्रतिशत हो गई है। इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग में भारत की बढ़ती ताकत और कुशल मानव संसाधन की क्षमता को एक बार फिर साबित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे अधिक नाविक उपलब्ध कराने के मामले में फिलीपींस अब भी पहले स्थान पर कायम है, जबकि भारत ने पिछले पांच वर्षों में अपनी हिस्सेदारी दोगुनी कर दूसरे स्थान पर मजबूत पकड़ बना ली है। बीआईएमसीओ-आईसीएस की यह रिपोर्ट हर पांच वर्ष में प्रकाशित होती है और इसे वैश्विक समुद्री उद्योग में नाविकों की मांग और आपूर्ति का सबसे विश्वसनीय आकलन माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी ताकत ऑफिसर कैडर में देखने को मिली है। वर्तमान में भारत दुनिया को 1.4 लाख से अधिक समुद्री अधिकारी (ऑफिसर्स) उपलब्ध करा रहा है, जो वैश्विक ऑफिसर वर्कफोर्स का 13.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके अलावा करीब 1.7 लाख रेटिंग्स (सहायक समुद्री कर्मचारी) भी दुनिया भर के मर्चेंट जहाजों पर सेवाएं दे रहे हैं, जो वैश्विक रेटिंग्स कार्यबल का 11.29 प्रतिशत हैं। समुद्री क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नाविकों की तकनीकी दक्षता, अनुशासन, अंग्रेजी भाषा पर पकड़ और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण ने उन्हें वैश्विक शिपिंग कंपनियों की पहली पसंद बनाया है। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में भारतीय समुद्री पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ी है। भारत की यह उपलब्धि न केवल समुद्री क्षेत्र में उसकी बढ़ती साख को दर्शाती है, बल्कि रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्री शिक्षा, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक पर निवेश की रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक समुद्री कार्यबल में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। यह उपलब्धि भारत की समुद्री क्षमता और विश्वस्तरीय मानव संसाधन की बढ़ती पहचान का भी प्रतीक है।