सुल्तानगंज श्रावणी मेले में इस बार 'अदृश्य' पुलिस का पहरा! बिछड़े कांवरियों को पल भर में ढूंढ निकालेगी एआई मशीन
भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध सुल्तानगंज श्रावणी मेले में इस बार बाबा भोलेनाथ के भक्तों (कांवरियों) की सुरक्षा, सुविधा और भीड़ प्रबंधन को अभेद्य बनाने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इस वर्ष के महाआयोजन में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिकतम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, एआई आधारित पीपल काउंटिंग मशीन और एडवांस मोबाइल ऐप की स्थापना के लिए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है। आगामी 6 जुलाई तक योग्य एजेंसी का चयन कर काम आवंटित करने की युद्धस्तर पर तैयारी है।
मेला क्षेत्र के सात किलोमीटर के लंबे और व्यस्त दायरे में श्रद्धालुओं की सटीक और वास्तविक संख्या का लाइव आंकड़ा जुटाने के लिए धांधी-बेलारी और सुल्तानगंज ओवरब्रिज के पास अत्याधुनिक एआई आधारित 'पीपल काउंटिंग मशीनें' लगाई जा रही हैं। मेला प्रबंधन से जुड़े आला अधिकारियों के मुताबिक, यह मशीन न केवल ऑनलाइन गिनती करेगी, बल्कि 'फेस रिकग्निशन' (चेहरे की पहचान) संबंधी डेटा भी रिकॉर्ड करेगी। इस तकनीक का सबसे बड़ा चमत्कारी फायदा सुरक्षा और 'खोया-पाया' प्रबंधन में मिलेगा। यदि मेला क्षेत्र की भारी भीड़ में कोई कांवरिया अपने परिवार से बिछड़ जाता है, तो कंट्रोल रूम में उसकी फोटो फीड करते ही एआई मशीन पूरे रूट पर उसे स्कैन कर पल भर में ढूंढ निकालेगी। इस वर्ष असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने और हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के लिए सुरक्षा का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इस साल मेले के 48 संवेदनशील स्थानों पर 110 हाई-टेक कैमरे (बुलेट, डोम और पीटीजेड) लगाए जाएंगे, जबकि पिछले साल 40 जगहों पर 93 कैमरे ही सक्रिय थे। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए इस बार छह प्रमुख और अति-संवेदनशील स्थानों पर लाइव वेबकास्टिंग कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी संख्या पिछली बार महज चार थी। इन सभी कैमरों का लाइव फीड सीधे जिला प्रशासन के मुख्य कंट्रोल रूम को मिलता रहेगा। सुरक्षा के साथ-साथ कांवरियों की सुगमता के लिए प्रशासन पिछले साल लॉन्च किए गए 'श्रावणी मेला ऐप' का बेहद एडवांस और अपग्रेड वर्जन लाने जा रहा है। मेले के उद्घाटन के साथ ही यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर लाइव हो जाएगा और पूरे मेला क्षेत्र में इसके क्यूआर कोड चस्पा किए जाएंगे। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में डिजाइन किया गया यह ऐप केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि मेले में मुस्तैद रहने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के जवानों के लिए भी गाइड का काम करेगा। ऐप के जरिए अधिकारी विभिन्न घाटों और रूटों पर भीड़ की वास्तविक स्थिति को देख सकेंगे, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, इस बार सुल्तानगंज का श्रावणी मेला अध्यात्म और आधुनिक डिजिटल विजन का एक अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।