ईरान-इजराइल महायुद्ध: ट्रंप की डेडलाइन से पहले दहला तेहरान, इजराइल ने पेट्रोकेमिकल प्लांट को किया तबाह
मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और तेज हो गई है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के 39वें दिन मंगलवार को तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई 'डेडलाइन' खत्म होने से ठीक पहले इजराइली वायुसेना ने ईरान के आर्थिक ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। इस भीषण हमले के बीच ईरान की ट्रेनें थम गई हैं और पूरा देश ब्लैकआउट की कगार पर है। अब तक इस जंग में मरने वालों का आंकड़ा 3400 को पार कर गया है। इजराइली रक्षा मंत्री कैट्ज ने दावा किया है कि उनकी सेना ने ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल फैसिलिटी को मलबे में तब्दील कर दिया है। यह प्लांट ईरान के कुल पेट्रोकेमिकल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा था। इस हमले का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पंगु बनाना है। वहीं, सोमवार को एक और बड़ी सफलता का दावा करते हुए इजराइल ने कहा कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड इंटेलिजेंस चीफ, मेजर जनरल माजिद खादेमी को एक सटीक हमले में मार गिराया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक 'होर्मुज स्ट्रेट' को व्यापार के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। पहले यह डेडलाइन सोमवार की थी, जिसे बाद में 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया। ट्रंप की इस धमकी के बाद खाड़ी देशों में युद्ध की आग और भड़क गई है। जंग के बीच शांति की एक धुंधली किरण 'इस्लामाबाद समझौता' के रूप में उभरी है। मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के बिचौलिए 45 दिनों के 'सीजफायर प्लान' पर काम कर रहे हैं। इस दो-चरणीय डील के तहत पहले चरण में युद्ध विराम होगा और होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोला जाएगा। हालांकि, कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगले 48 घंटों में किसी समझौते की उम्मीद कम है, क्योंकि ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए नई और कड़ी शर्तें रख दी हैं। युद्ध की आग केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के ठिकानों पर कहर बरपाया है, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई है। वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान और हिज्बुल्ला ने इजराइल के हाइफा और अन्य शहरों को निशाना बनाया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक ईरान में 1900 और लेबनान में 1400 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां ट्रंप की डेडलाइन की ओर बढ़ रही हैं, पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं कि क्या यह युद्ध विश्व युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति काम आएगी।