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गोल्ड कारोबार की चमक के पीछे बड़ा घोटाला? सेबी की जांच में राजेश एक्सपोर्ट्स पर गंभीर आरोप, शेयर बाजार में हड़कंप और निवेशकों की बढ़ी चिंता

editor
  • Awaaz Desk
  • June 05, 2026 07:06 AM
Is there a major scam behind the gold rush? A SEBI investigation has uncovered serious allegations against Rajesh Exports, sparking panic in the stock market and heightening investor concerns.

नई दिल्ली। शेयर बाजार रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने देश की प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी एवं रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके प्रमोटर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और पैसे का गबन करने का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता को अगले आदेश तक प्रतिभूति बाजार में किसी भी प्रकार के शेयर लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है।

109 पन्नों की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
4 जून को जारी अपने 109 पृष्ठों के अंतरिम आदेश में सेबी ने दावा किया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सहयोगी कंपनियों (सब्सिडियरीज) के माध्यम से कई वर्षों तक अपने कारोबार और राजस्व को वास्तविकता से कहीं अधिक दर्शाया। नियामक के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी के खातों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। सेबी के आरोपों के मुताबिक कंपनी ने करीब 158.3 अरब डॉलर यानी लगभग 15.16 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से दर्शाया। यह राशि संबंधित अवधि में कंपनी द्वारा घोषित कुल राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत बताई जा रही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है।

क्या करती है राजेश एक्सपोर्ट्स?
राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड देश की प्रमुख स्वर्ण आभूषण निर्माता और निर्यातक कंपनियों में शामिल रही है। कंपनी सोने की रिफाइनिंग, आभूषण निर्माण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात का कारोबार करती है। कंपनी दुनिया की प्रसिद्ध गोल्ड रिफाइनरी वैलकैम्बी एसए की मालिक भी है। लंबे समय तक इसे भारतीय जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में गिना जाता रहा है।

निवेशकों की दौलत को लगा बड़ा झटका
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक कंपनी का शेयर लगभग 42 प्रतिशत टूट चुका है। वहीं एक वर्ष में 49 प्रतिशत, तीन वर्षों में 82 प्रतिशत और पांच वर्षों में करीब 81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कैश फ्लो स्टेटमेंट दाखिल नहीं करने और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बाद जून 2023 से कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट देखी गई। इसके चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 12,725 करोड़ रुपये की कमी आई है।

एलआईसी का भी फंसा बड़ा निवेश
इस पूरे घटनाक्रम का असर देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तिमाही तक एलआईसी के पास कंपनी की 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। एलआईसी के पास कंपनी के लगभग 3.18 करोड़ शेयर मौजूद थे, जिनकी बाजार कीमत 4 जून के हिसाब से करीब 330 करोड़ रुपये आंकी गई। जानकारी के अनुसार सितंबर 2023 से एलआईसी ने अपनी हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं किया है।

सेबी की कार्रवाई के बाद शेयरों में भूचाल
सेबी के अंतरिम आदेश के सामने आते ही शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों पर जबरदस्त दबाव देखने को मिला। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ही कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। दोपहर तक शेयर लगभग 104 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की जांच आगे बढ़ने के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबारी गतिविधियों को लेकर और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ सकती है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर फिर उठे सवाल
राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगे आरोपों ने एक बार फिर भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता, ऑडिटिंग प्रक्रिया और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर सेबी की आगामी कार्रवाई और कंपनी की ओर से आने वाले जवाब पर टिकी हुई है। बाजार में इस मामले को हाल के वर्षों के सबसे बड़े कॉर्पोरेट विवादों में से एक माना जा रहा है।


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