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ईरान में इजरायल का बड़ा धमाका, न्यूक्लियर कंपाउंड को बनाया निशाना; तेहरान का आसमान हुआ काला

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 12, 2026 11:03 AM
Israel detonates massive explosion in Iran, targets nuclear compound; Tehran's sky darkens

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष तेजी से गंभीर संकट में बदल गया है। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान में कई जगहों पर हवाई हमले किए। इसी बीच गुरुवार को इजराइल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला किया। इस दौरान तेहरान में जोरदार धमाके हुए। एक पत्रकार के अनुसार शहर के पश्चिमी हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर हमला किया तो तेहरान कोई संयम नहीं रखेगा। गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर ईरानी द्वीपों की जमीन पर हमला हुआ तो ईरान सभी सीमाएं तोड़ देगा। उन्होंने कहा कि हमलावरों के खून सेफारस की खाड़ी लाल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस द्वीप की बात की जा रही है। लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने संघर्ष बढ़ने की स्थिति में खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना पर विचार किया है। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह देश के तेल निर्यात के लिए एक अहम केंद्र है।

ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक जहाज को निशाना बनाया है। इस जहाज पर मार्शल द्वीपसमूह का झंडा लगा था, लेकिन ईरान का कहना है कि यह जहाज अमेरिका के स्वामित्व में था। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने आधिकारिक पोर्टल सेपाह न्यूज पर कहा कि सेफसी नाम का यह जहाज अमेरिकी सेना की संपत्ति था और चेतावनियों की अनदेखी करने के बाद इसे निशाना बनाया गया। हालांकि इस घटना को लेकर स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी दौरान इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एक इतालवी सैन्य ठिकाने पर भी हमला हुआ। अधिकारियों के अनुसार हमले से कुछ नुकसान हुआ, लेकिन किसी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इस हमले की कड़ी निंदा की। यह हमला एरबिल में स्थित कैंप सिंगारा सैन्य परिसर में हुआ, जहां अमेरिका सहित कई देशों के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। कैंप सिंगारा के कमांडर स्टेफानो पिजोटी के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमला ड्रोन से किया गया या मिसाइल से। हालांकि हमले से बेस की कुछ इमारतों और उपकरणों को नुकसान पहुंचा है। इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार खाड़ी देशों ने तेल उत्पादन में भारी कटौती की है, जिससे आपूर्ति में बड़ी कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल का उत्पादन कम से कम 80 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया है। इसके अलावा करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है, जो दुनिया में तेल परिवहन का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और भी कम हो गई है।
 


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