कभी कहा जाता था रॉयल इंडियन एयरफोर्स, रॉयल शब्द कब हटाया गया? जानिए एक क्लिक में
आज भारतीय वायुसेना(Indian airforce) अपना 89वां स्थापना दिवस मना रही है। पूरा देश सोशल मीडिया पर वायुसेना स्थापना दिवस की बधाइयां प्रेषित कर रहा है। इस मौके पर भारतीय वायुसेना के जांबाज जवान आसमान में रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब दिखाते नज़र आये। आज इस मौके पर भारतीय वायुसेना के 3 UNIT को चीफ ऑफ एयर स्टॉफ यूनिट प्रशस्ति पत्र दिया जा रहा है,जिसमे 26 फरवरी 2019 के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक करने वाले और पिछले साल अप्रैल मई से अब तक चीन की साजिशों के खिलाफ लद्दाख सेक्टर में हाईं एल्टीट्यूड पर ऑपरेशन करने वाले 47 स्क्वार्डन भी शामिल है।
आपको बता दें कि वायुसेना ध्वज, वायु सेना निशान से अलग, नीले रंग का है जिसके शुरुआती एक चौथाई भाग में राष्ट्रीय ध्वज बना है और बीच के हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों अर्थात् केसरिया, श्वेत और हरे रंग से बना एक वृत्त (गोलाकार आकृति) है। यह ध्वज 1951 में अपनाया गया।
भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है- 'नभ: स्पृशं दीप्तम' है। इसे गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है। देश आजाद होने से पहले वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स (आरआईएएफ) कहा जाता था। आजादी के बाद वायुसेना के नाम में से "रॉयल" शब्द को हटाकर "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया। 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना का पहला दस्ता बना जिसमें 6 आएएफ-ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था।