माइनिंग से माइंड' की ओर बढ़ेगा झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा निर्देश,विश्वविद्यालयों में खाली पद तुरंत भरें, शुरू होंगी रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी पढ़ाई
रांची। झारखंड को खनिज संपदा की पहचान से आगे ले जाकर ज्ञान और तकनीक के वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोटूक शब्दों में कहा कि राज्य को "माइनिंग (खनन) से माइंड (बौद्धिक विकास) बेस्ड" पहचान की ओर ले जाने के लिए उच्च शिक्षा के ढांचे को पूरी तरह बदलना होगा।
बैठक में सीएम ने विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को भरने, छात्रों को हाई-टेक शिक्षा देने और प्रमुख संस्थानों को अपग्रेड करने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों पर अपनी मुहर लगाई। इस समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने युवाओं के हित में कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण समय-सीमाएं (डेडलाइन) दी हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को भरने के लिए पद स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए 'झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग' को अगले 15 दिनों के भीतर पूरी तरह प्रभावी और सक्रिय करने को कहा गया है। छात्रों के हितों की रक्षा और गाइडलाइंस के पालन के लिए 'कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी' को भी आगामी 15 दिनों के भीतर पूरी तरह कार्यरत करने का सख्त निर्देश दिया गया है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड के गौरव माने जाने वाले बीआईटी सिंदरी को जल्द ही 'यूनिटरी विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया जाएगा। इसके लिए सरकार आगामी सत्र में विशेष विधेयक पेश करेगी। इसके अलावा, छात्रों में तकनीकी कौशल और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पहली बार 'झारखंड रोबोटिक्स फेस्टिवल' की शुरुआत की जाएगी। राज्य के नौ प्रमुख जिलों रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद के अलावा पलामू, गिरिडीह, रामगढ़, गुमला, गोड्डा और साहिबगंज में विशेष 'तकनीकी शिक्षा क्लस्टर' विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही, राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों को अब 'झारखंड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रूप में उन्नत किया जाएगा। सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईआईटी और एनआईटी की तर्ज पर भविष्य की जरूरतों से जुड़े इन आधुनिक विषयों की पढ़ाई शुरू होगी। इन सभी उन्नत संस्थानों के बेहतर संचालन के लिए एक विशेष 'काउंसिल फॉर इंस्टीट्यूट्स ऑफ एमिनेंस' की स्थापना भी की जाएगी।शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्य के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए 'लाइव ऑनलाइन क्लास' के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरुआत प्रथम चरण में 'झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय' और 'बीबीएमके धनबाद' से होगी। मुख्यमंत्री ने 'गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम' का दायरा बढ़ाते हुए कल्याण विभाग के साथ मिलकर ज्यादा से ज्यादा गरीब और जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा ऋण (लोन) दिलाने का निर्देश दिया है। इसके तहत दुमका फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने वाले पायलट ट्रेनिंग के अभ्यर्थियों को भी इस योजना का लाभ देने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा गया है, ताकि पैसे की कमी के कारण किसी भी मेधावी छात्र का सपना न टूटे।