बेहद गंभीर मुद्दों पर भी झारखंड के पुलिस कप्तान लापरवाह! नॉर्थ-ईस्ट से जुड़े मामले में 5 बार रिमाइंडर के बाद भी रिपोर्ट शून्य
झारखंड में कानून-व्यवस्था को धरातल पर मजबूत करने का दावा करने वाले जिलों के पुलिस कप्तान केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के अति-महत्वपूर्ण व उच्च प्राथमिकता वाले निर्देशों को लेकर कितने गंभीर हैं, इसकी एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य के सभी 24 जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर घोर लापरवाही बरत रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मांगी गई एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय द्वारा पांच-पांच बार 'रिमाइंडर' (स्मरण पत्र) भेजे जाने के बावजूद जिलों से कोई जवाब नहीं आया है। यह पूरा मामला उत्तर-पूर्वी (नॉर्थ-ईस्ट) राज्यों के नागरिकों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव और उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। जिलों की इस बेरुखी से अब पुलिस मुख्यालय बेहद नाराज है। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के नागरिकों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव को रोकने के लिए की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसमें दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाई गई बेहतरीन प्रथाओं को पूरे देश में लागू करने, पुलिसकर्मियों को इस विषय पर संवेदनशील बनाने, विशेष शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने और नस्लीय घटनाओं पर की गई त्वरित कानूनी कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने केंद्रीय पत्र का हवाला देते हुए राज्य के सभी जिलों के एसएसपी, एसपी और रेल एसपी को दिशा-निर्देश जारी कर तुरंत रिपोर्ट भेजने को कहा था, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। हैरानी की बात यह है कि इस अति-संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर राज्य के किसी भी जिले से तय समय सीमा (3 जून) तक कोई भी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय नहीं पहुंची। स्थानीय स्तर पर पुलिस द्वारा अपनाई गई नीतियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम, पुलिस-ट्रेनिंग मॉड्यूल, शिकायत निवारण व्यवस्था और किसी भी सुधारात्मक कदम की जानकारी देने में सभी जिले पूरी तरह नाकाम रहे। लगातार पांच बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी रिपोर्ट न मिलने पर पुलिस मुख्यालय ने कड़े शब्दों में पत्र लिखकर स्थिति पर गहरा खेद जताया है। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अधीनस्थ जिलों में नॉर्थ-ईस्ट के नागरिकों के साथ भेदभाव का कोई मामला दर्ज है, तो उसकी पूरी जानकारी तुरंत भेजी जाए, ताकि केंद्र को समेकित रिपोर्ट भेजी जा सके। यह पूरा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के 14 दिसंबर 2016 के ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा हुआ है। हाल ही में 15 दिसंबर 2025 को हुई मॉनिटरिंग कमेटी की 15वीं बैठक में उन राज्यों को फिर से याद दिलाने की सिफारिश की गई थी जिन्होंने रिपोर्ट नहीं भेजी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कई राज्यों के पुलिस महानिदेशक स्तर से भी इस मामले में ढिलाई हुई है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली पुलिस के मॉडल को पूरे देश में अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें संवेदनशीलता प्रशिक्षण और त्वरित शिकायत निवारण शामिल है। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने अब अल्टीमेटम जारी करते हुए सभी जिलों से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है। सूत्रों के मुताबिक, यदि अब भी रिपोर्ट नहीं भेजी गई, तो संबंधित जिला कप्तानों के खिलाफ उच्च स्तर पर विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।