झारखंड का सियासी सस्पेंस: "56 नहीं, 61 हैं हम!", राज्यसभा वोटिंग के बीच सीएम हेमंत सोरेन के हुंकार से मचा हड़कंप
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रही वोटिंग के बीच सूबे का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मतदान के ठीक बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक नए और बेहद चौंकाने वाले नारे ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।जरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई नतीजों में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है?
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए जारी मतदान के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक बयान राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। मतदान से पहले महागठबंधन की ताकत को लेकर दिया गया उनका नारा—“56 नहीं, 61 हैं हम”—अब केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बन गया है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों से पहले इस बयान ने सियासी हलकों में रोमांच और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी है। राज्यसभा चुनाव में झारखंड की दो सीटों के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। महागठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी चुनावी चुनौती पेश कर रहे हैं। चुनाव के मद्देनजर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
मतदान से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार यह दावा करते रहे कि महागठबंधन के पास केवल 56 नहीं, बल्कि 61 विधायकों का समर्थन है। उनके इस बयान को विपक्ष के लिए राजनीतिक संदेश और अपने सहयोगी दलों के प्रति विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नारे के जरिए मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की आशंका नहीं है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के इस दावे पर सवाल भी उठाए। एनडीए नेताओं का कहना था कि वास्तविक ताकत चुनाव परिणाम आने के बाद ही सामने आएगी। इसी कारण मतदान से पहले दोनों पक्षों ने अपने विधायकों की निगरानी और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज कर दिया था।एनडीए ने अपने सभी विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराया था, ताकि किसी तरह की राजनीतिक हलचल या संपर्क की संभावना को रोका जा सके। वहीं कांग्रेस के विधायक अलग कैंप में मौजूद रहे। दूसरी तरफ झामुमो ने अपने विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई, जहां गठबंधन उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान सुनिश्चित करने और एकजुटता बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही अहम विधायकों की एकजुटता भी होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री का “56 नहीं, 61 हैं हम” वाला बयान चुनावी गणित से कहीं अधिक राजनीतिक आत्मविश्वास का प्रदर्शन माना जा रहा है। मतदान के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सभी दल अपने-अपने दावों के साथ जीत का भरोसा जता रहे हैं। हालांकि असली तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी कि हेमंत सोरेन का दावा कितना सही साबित होता है और राज्यसभा की दोनों सीटों पर किस दल का दबदबा कायम रहता है। फिलहाल झारखंड की राजनीति में एक ही नारा सबसे ज्यादा गूंज रहा है“56 नहीं, 61 हैं हम।” अब सबकी नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं, जो इस दावे की सच्चाई और राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर सामने लाएंगे।