जेपीएससी-जेएसएससी विवाद ने पकड़ा तूल: आंदोलन के बीच नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही, सीएम हेमंत सोरेन बोले-सरकार हर छात्र से बात करने को तैयार
रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और अधिक उग्र होता नजर आ रहा है। एक ओर हजारों अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के दौरान एक नया विवाद सामने आया है। रांची में प्रदर्शन के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी गई। इस घटना के बाद आंदोलन स्थल पर कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई, जबकि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्याही फेंकने वाले युवक को हिरासत में ले लिया।
घटना के बाद नेहा बोरा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "20 जुलाई को हम पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। जब हम उससे नहीं डरे, तो यह साधारण स्याही हमारा क्या बिगाड़ लेगी? हम छात्रों की आवाज उठाते रहेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।" उनके इस बयान के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों ने भी सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है और संवाद का माध्यम पहले से तय किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर छात्र की समस्या को समझना चाहती है और उसका समाधान निकालने की इच्छा रखती है। हेमंत सोरेन ने कहा, "जो माध्यम है, वह हमने बता दिया है और बात करने के लिए भी हम तैयार हैं। सरकार प्रत्येक छात्र की समस्या का समाधान चाहती है। जयपाल सिंह स्टेडियम में जो आवाज उठ रही है, उसे हम व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। राज्य के सभी छात्र-छात्राएं अपनी राय रखें, सरकार उसे गंभीरता से सुनेगी। बड़े सुधारों के साथ हम भर्ती व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उधर, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें से एक अभ्यर्थी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में दूसरी रैंक प्राप्त की थी और उसके परिवार के कई सदस्य भी विभिन्न परीक्षाओं में सफल हुए थे। ऐसे में केवल एक परीक्षा ही नहीं, बल्कि उस अभ्यर्थी द्वारा दी गई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं और संबंधित भर्ती एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं की भी गहन जांच होनी चाहिए। इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा आंदोलनरत छात्रों से संवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आधा महीना बीतने के बाद राहुल गांधी को छात्रों की याद आई। यदि वास्तव में छात्रों के हित की चिंता थी, तो उन्हें मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग करनी चाहिए थी। संजय सेठ ने आरोप लगाया कि केवल आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मिलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच की मांग भी उतनी ही जरूरी है। गौरतलब है कि जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्र विवादित परीक्षाओं की जांच, जवाबदेही तय करने और भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है, तो दूसरी ओर छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संवाद के जरिए इस विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता है।