काशी विश्वनाथ पूजा विवाद:पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पूजा अर्चना में पैदा हुआ विवाद,जांच हुई शुरू! जानिए क्यों मामले ने पकड़ा तूल
सनातन धर्म में सूतक का बड़ा ही महत्व होता है। जिस परिवार में सूतक लग जाये वहां कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य 12 से 13 दिनों तक नही किये जा सकते। सूतक तब लगता है जब किसी परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है। मृत व्यक्ति के परिजनों को 10 दिन तथा अंत्यक्रिया करने वाले को 12 से 13 दिन (सपिंडीकरण तक) सूतक पालन कड़ाई से करना होता है। मूलत: यह सूतक काल सवा माह तक चलता है। सवा माह तक कोई किसी के घर नहीं जाता है। सवा माह अर्थात 37 से 40 दिन। 40 दिन में नक्षत्र का एक काल पूर्ण हो जाता है। घर में कोई सूतक (बच्चा जन्म हो) या पातक (कोई मर जाय) हो जाय 40 तक का सूतक या पातक लग जाता है।
देश मे सूतक पर खासा विवाद उतपन्न हो गया है,क्योंकि इसका सम्बंध सीधे तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी से जो है। दरअसल 13 दिसम्बर को भारत के पीएम नरेंद्र मोदी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचे थे जहां उन्होंने विश्वधाम के लोकार्पण के बाद गर्भगृह में एक अर्चक के साथ बैठकर पूजा अर्चना की थी। अर्चक श्रीकांत मिश्रा के घर उनके सगे भतीजे वेद प्रकाश की 5 दिसम्बर को सड़क दुर्घटना में हुई मौत की वजह से सूतक लगा हुआ था। ऐसे में अर्चक श्रीकांत मंदिर में बैठकर पूजा अर्चना कैसे कर सकते थे जबकि सूतक काल मे देवालय मंदिर इत्यादि जाना तक प्रतिबंधित होता है। अर्चक के घर सूतक लगा था इसका खुलासा भी तब हुआ जब अर्चक के भतीजे की तेहरवीं का निमंत्रण पत्र सामने आया।
अर्चक पर लगे सूतक के बावजूद उसके द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पूजा अर्चना करने पर अब लोगो की नाराज़गी सामने आ रही है। यहां तक कि इस मामले में काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व सदस्य प्रदीप कुमार बजाज ने खुद पूरे तथ्यों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी,सीएम योगी आदित्यनाथ, और सम्बंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र लिखा है। जिसमे उन्होंने लिखा है कि पूजा के दिन अर्चक के सगे भतीजे की मृत्यु हुए 9 दिन ही हुए थे। ऐसे में अर्चक ने 13 दिसम्बर को पीएम नरेंद्र मोदी से विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पूजा कैसे करवाई? शास्त्र संवत तरीके से अर्चक इस तरह पूजन नही करवा सकते। जबकि कुछ मान्यताओं के अनुसार परिवार में किसी उपनयन संस्कार और विवाह संस्कार हो चुके व्यक्ति की मृत्यु पर 13 दिनों के बाद ही अशौच यानी सूतक समाप्त हुआ माना जाता है।