लाल आतंक का 'आखरी किला' ध्वस्त: 2.20 करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा गिरफ्तार,ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' में ढहा माओवादियों का सबसे बड़ा गढ़
रांची। झारखंड में लाल आतंक के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी गई है। सुरक्षाबलों को माओवादी विरोधी अभियान के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। 'ऑपरेशन दौरा पहाड़' के तहत झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों के सटीक एक्शन ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन की रीढ़ ही तोड़ दी है। संगठन का अंतिम सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹2.20 करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सागर अपने चार शीर्ष साथियों के साथ सलाखों के पीछे पहुँच गया है।
बुधवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी तदाशा मिश्रा, सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह और आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक कामयाबी का खुलासा करते हुए गिरफ्तार नक्सलियों को मीडिया के सामने पेश किया। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि धनबाद, गिरिडीह जिला पुलिस और 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने खुफिया इनपुट के आधार पर धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के घने जंगलों में 'ऑपरेशन दौरा पहाड़' चलाया। इस गुप्त और बेहद जोखिम भरे अभियान में माओवादी शीर्ष नेतृत्व को बिना किसी बड़े नुकसान के दबोच लिया गया। गिरफ्तार माओवादियों के पास से तीन घातक AK-47 राइफलें, आठ मैगजीन और 288 जिंदा गोलियां बरामद की गई हैं। सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने जानकारी दी कि मिसिर बेसरा पर झारखंड और ओडिशा, दोनों राज्यों में भयानक खौफ का साम्राज्य था। उस पर ₹1 करोड़ का इनाम, ₹1.20 करोड़ का इनाम घोषित था। अकेले मिसिर बेसरा के खिलाफ 175 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही पकड़ा गया संगठन का टॉप कमांडर मेहनत उर्फ मोचू भी ₹15 लाख का इनामी है, जिस पर 137 से अधिक आपराधिक केस दर्ज हैं। इसके अलावा गौरव उर्फ बीरेंद्र हांसदा (ACM) और दो अन्य सहयोगी भी दबोचे गए हैं। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों के लगातार प्रहार से माओवादी संगठन पूरी तरह बिखर चुका है। 27 नक्सलियों ने 18 हथियारों संग किया आत्मसमर्पण। शीर्ष कमांडर रविंद्र गंझू और अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी।16 माओवादियों ने 11 हथियारों के साथ डाले हथियार।झारखंड पुलिस ने दावा किया है कि राज्य से माओवादी नेतृत्व का पूरी तरह सफाया हो चुका है। पुलिस प्रशासन ने बचे-खुचे उग्रवादियों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं, वरना कानून का शिकंजा तय है।