अंतिम सफरः राजौरी में मारे गए हिन्दुओं का अंतिम संस्कार! गम और गुस्से के बीच लोगों ने दी अंतिम विदाई, पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश
नई दिल्ली। जम्मू के डांगरी गांव में आज गम और गुस्से के बीच आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को अंतिम विदाई दी गयी। इस दौरान लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। डांगरी के सरपंच धीरज शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में एक ग्राम रक्षा समिति थी, लेकिन पुलिस ने 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों से हथियार ले लिए थे। उन हथियारों को फिर से अलॉट भी नहीं किया गया। अगर समिति के लोगों के पास हथियार होते तो वे रविवार को आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते। धीरज शर्मा का कहना था कि पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज नहीं आने वाला है। ऐसे में अब लोग अपनी सुरक्षा के लिए हथियार उठाने को तैयार हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी आतंकवादी भारत में घुसपैठ के लिए राजौरी सेक्टर में LOC पर फॉरवर्ड डिफेंस लोकेशन को निशाना बना रहे हैं। राजौरी सेक्टर के पास पाकिस्तान की तरफ चार लॉन्चिंग पैड हैं। लगभग 25-30 आतंकवादी कोटली, लंजोटे, निकल और खुइरेटा में इन लॉन्चिंग पैड्स का उपयोग करके भारत में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं। पाकिस्तान की नफरत फैलाने की साजिशें नाकाम होंगी। हाईवे पर बैठे लोगों में आतंकियों से दहशत नहीं... गुस्सा ज्यादा था। लोगों में जिला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ भी रोष था। उनका आरोप था कि पूरे इलाके में तलाशी अभियान न चलाने की वजह से सोमवार को धमाका हुआ। राजौरी म्युनिसिपल काउंसिल के उपाध्यक्ष भारत भूषण ने भी ग्राम सुरक्षा समितियों को हथियार मुहैया कराने की अपील की है। सोमवार को राजौरी बंद के दौरान राजौरी-पुंछ नेशनल हाईवे पर शवों को सड़क पर रख कर लोगों ने प्रदर्शन किया। अधिक सुरक्षा की मांग और टारगेटेड किलिंग के विरोध में ग्रामीणों का कहना था कि वारदात पर लगाम नहीं लग पा रही हैं। स्थानीय लोगों की मांग पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा देर शाम मौके पर पहुंचे।