स्टील प्लांट में बड़ा हादसा: काम के दौरान ठेका कर्मी की मौत,अस्पताल में परिजनों का भारी हंगामा
बोकारो। झारखंड के औद्योगिक शहर बोकारो से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आ रही है। बोकारो स्टील प्लांट के भीतर संचालित बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बीपीएससीएल) के कोल हैंडलिंग प्लांट में काम के दौरान एक ठेका मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और साथी कामगारों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने बोकारो जनरल अस्पताल में शव को रखकर जमकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, दुग्धा के रहने वाले ठेका कर्मी शिव शंकर हेंब्रम बीपीएससीएल के कोल हैंडलिंग प्लांट में कार्यरत थे। बुधवार की रात वे अपनी ड्यूटी पर थे, तभी अचानक काम के दौरान एक भीषण हादसा हो गया। प्लांट में मौजूद साथी मजदूरों का आरोप है कि पाइपलाइन से जुड़े काम को करने के दौरान अचानक जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसकी चपेट में आने से शिव शंकर गंभीर रूप से झुलस गए और अचेत होकर गिर पड़े। हादसे के तुरंत बाद आनन-फानन में घायल कर्मी को इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही शिव शंकर की मौत की खबर प्लांट के अन्य मजदूरों और उनके परिजनों को मिली, बड़ी संख्या में लोग बीजीएच पहुंच गए। अपनों को खोने के गम और प्रबंधन की कथित लापरवाही के खिलाफ परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही हंगामा शुरू कर दिया। आक्रोशित परिजनों और श्रमिक संगठनों की मांग है कि मृतक के आश्रित को तत्काल प्रबंधन की ओर से स्थायी नौकरी दी जाए और उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। हंगामे के कारण अस्पताल परिसर में काफी देर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। घटना की गंभीरता को देखते हुए फैक्ट्री इंस्पेक्टर शिवानंद लगुरी तुरंत मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने हादसे की पुष्टि तो की है, लेकिन कहा कि मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल पाएगा। फिलहाल, फैक्ट्री विभाग और संबंधित बीपीएससीएल प्रबंधन की तकनीकी टीम मामले की उच्च स्तरीय जांच कर रही है। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर प्लांट के भीतर ठेका मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।