चंपावत में बड़ा हादसा: टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे पर 70 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, हरियाणा के 3 पर्यटक गंभीर
चंपावत। उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर रफ्तार और थकान का जानलेवा खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ मुनस्यारी से घूमकर हरियाणा के सोनीपत लौट रहे पर्यटकों की एक कार अचानक अनियंत्रित होकर चल्थी के समीप करीब 70 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में कार सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से तीन की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, पर्यटकों की कार संख्या HR10AN7221 बुधवार सुबह लगभग 4 बजे मुनस्यारी से सोनीपत (हरियाणा) की ओर जा रही थी। जैसे ही कार चल्थी के पास पहुँची, अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और चीख-पुकार के बीच कार सड़क से नीचे गहरी और पथरीली खाई में जा समाई। सन्नाटे को चीरती हुई आई आवाज को सुनकर आसपास के लोग सहम गए और तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। हादसे की सूचना मिलते ही चल्थी चौकी प्रभारी राकेश कठायत के नेतृत्व में पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुँची। घने अंधेरे और गहरी खाई की परवाह न करते हुए पुलिसकर्मियों और स्थानीय निवासियों ने मिलकर तुरंत संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बेहद सूझबूझ और कड़ी मशक्कत के बाद खाई में फंसे सभी पांचों घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और 108 एंबुलेंस के जरिए तत्काल उप जिला चिकित्सालय टनकपुर पहुँचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत घायलों का इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार, तीन पर्यटकों की चोटें बेहद गंभीर हैं। गंभीर रूप से घायलों में मोहित (33) पुत्र जगजीत, अमनदीप (30) पुत्र राकेश कुमार, और अतुल (32) पुत्र सतपाल शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। वहीं, अन्य दो घायलों विवेक सिंह (32) पुत्र वीरेंद्र सिंह और कार चालक आदित्य (32) पुत्र स्व. नरेश कुमार (सभी निवासी शहजादपुर, सोनीपत, हरियाणा) को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। चौकी प्रभारी राकेश कठायत ने बताया कि प्रारंभिक जांच और पूछताछ में दुर्घटना का मुख्य कारण तड़के के समय चालक को अचानक नींद की झपकी आना माना जा रहा है। लंबी दूरी और लगातार ड्राइविंग की वजह से चालक को थकान हो गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। फिलहाल पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। पहाड़ी और घुमावदार मार्गों पर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चालक की थकान और नींद अक्सर बड़े हादसों को दावत देती है। चंपावत के इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मैदानी इलाकों के मुकाबले पहाड़ी सड़कों पर सफर करते समय अतिरिक्त सतर्कता, संयमित रफ्तार और पर्याप्त विश्राम कितना अनिवार्य है, ताकि किसी की खुशियां मातम में न बदलें।