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उत्तराखंड में मदरसों पर बड़ा एक्शन: 23 की सरकारी इमदाद रोकी, जांच के डर से 10 संचालकों ने थमाया 'बंदी' का नोटिस

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 08, 2026 07:05 AM
Major Action Against Madrasas in Uttarakhand: Government Aid Halted for 23; Fearing Investigation, 10 Operators Issue 'Closure' Notices.

हरिद्वार। प्रदेश के मदरसों में चल रही अनियमितताओं को लेकर धामी सरकार की सख्ती के बाद हरिद्वार जिले में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल और कार्रवाई देखने को मिली है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने प्रारंभिक जांच में खामियां पाए जाने पर जिले के 23 मदरसों की सरकारी सहायता राशि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन की इस कड़ाई से हड़कंप मच गया है, जिसके चलते 10 मदरसा संचालकों ने आनन-फानन में संस्थान बंद करने का नोटिस प्रशासन को थमा दिया है।

जांच की आंच सबसे ज्यादा लक्सर क्षेत्र के सुल्तानपुर में देखने को मिली है। यहां चल रहे 6 मदरसों के खिलाफ क्षेत्रीय विधायक मोहम्मद शहजाद ने अनियमितताओं की शिकायत की थी। प्रारंभिक जांच में इन शिकायतों में दम पाया गया, जिसके बाद जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में अब पूरे जिले के उन मदरसों की कुंडली खंगाली जा रही है जो सरकारी योजनाओं जैसे मिड-डे मील और अन्य वित्तीय सहायता का लाभ ले रहे हैं। मदरसों में पारदर्शिता लाने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर 19 अप्रैल को एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। संचालकों को आदेश था कि वे रोजाना मदरसों में बच्चों की उपस्थिति और मिड-डे मील की फोटो ग्रुप में साझा करेंगे।10 दिनों की निगरानी में 4 मदरसों ने एक बार भी रिपोर्ट नहीं भेजी। तीन मदरसों ने वित्तीय वर्ष की योजना का डाटा देने से ही इनकार कर दिया। प्रशासन को शक है कि अब तक छात्र संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर सरकारी बजट का बंदरबांट किया जा रहा था। जैसे ही जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाई, 10 मदरसा संचालकों ने मदरसा बंद करने का नोटिस दे दिया। प्रशासन इसे जांच से बचने की पैंतरेबाजी मान रहा है। माना जा रहा है कि इन संचालकों ने फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धन की मोटी रकम डकारी है और अब पकड़े जाने के डर से मदरसे बंद करने का बहाना बना रहे हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बंदी का नोटिस देने वाले और रिपोर्ट न देने वाले इन 14 मदरसों की भूमिका की गहनता से जांच होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति बनाई है। इसमें शामिल हैं: जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) अमित कुमार चंद, जिला प्रोबेशन अधिकारी,जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी,संबंधित क्षेत्र के एसडीएम अथवा तहसीलदार,यह कमेटी मदरसों के भौतिक सत्यापन, बैंक खातों और मिड-डे मील के खर्चों की बारीकी से जांच करेगी। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जांच के बाद जिन मदरसों में भारी अनियमितताएं मिलेंगी, उन्हें स्थायी रूप से बंद किया जाएगा। केवल उन्हीं मदरसों को चलाने की अनुमति दी जाएगी जो सरकारी मानकों और पारदर्शिता का शत-प्रतिशत पालन करेंगे। हरिद्वार जिले में हुई इस कार्रवाई ने शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों की नींद उड़ा दी है। सरकारी बजट का दुरुपयोग रोकने के लिए प्रशासन का यह 'डिजिटल मॉनिटरिंग' मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी नजीर बन सकता है।


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