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एअर इंडिया का बड़ा एक्शन: नशे की हालत में विमान उड़ा रहे कैप्टन की नौकरी खत्म, 36 हजार फीट की ऊंचाई पर फेल हुए थे हाइड्रोलिक सिस्टम

editor
  • Tapas Vishwas
  • September 04, 2026 02:09 PM
Major action by Air India: Pilot fired for flying aircraft while intoxicated; hydraulic systems had failed at an altitude of 36,000 feet.

नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र में सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर एअर इंडिया ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट  के 34 वर्षीय पायलट-इन-कमांड (कैप्टन) को साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीले पदार्थ) के टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों, फिटनेस और नियामकीय जरूरतों के मामले में कंपनी की 'जीरो टॉलरेंस नीति' लागू है। यह सख्त फैसला एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद लिया गया है, जिसमें विमान में तकनीकी खराबी के साथ-साथ पायलट के नशे में होने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। घटना 4 अगस्त 2026 की है। एअर इंडिया का एयरबस A320neo विमान फुकेत से दिल्ली आ रहा था। विमान में 3 बच्चों समेत 137 यात्री, 6 केबिन क्रू और 2 पायलट (कुल 145 लोग) सवार थे।

जब विमान करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी अचानक कुछ ही सेकंड के भीतर विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक के बाद एक फेल हो गए। इसके तुरंत बाद ऑटोपायलट बंद हो गया और स्टॉल वॉर्निंग (विमान के गिरने की चेतावनी) बजने लगी। हाइड्रोलिक फेल होने से विमान पहले अचानक करीब 372 फीट ऊपर गया और फिर झटके से 292 फीट नीचे आ गिरा। उस वक्त सीट बेल्ट का साइन बंद था, जिससे झटके के कारण विमान के भीतर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में 20 यात्री और 4 केबिन क्रू समेत कुल 24 लोग घायल हो गए। दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग के बाद 20 लोगों को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई, जबकि 4 गंभीर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शुरुआत में इसे टर्बुलेंस माना जा रहा था, लेकिन नुकसान की गंभीरता को देखते हुए हादसे की विस्तृत जांच शुरू की गई। दिल्ली में लैंडिंग के बाद दोनों पायलटों की गहन मेडिकल जांच की गई। शराब की जांच के लिए किया गया 'ब्रेथ एनालाइजर' टेस्ट तो नॉर्मल आया, लेकिन 'साइकोएक्टिव सब्सटेंस' जांच में 34 वर्षीय पायलट-इन-कमांड का सैंपल 'नॉन-नेगेटिव' (पॉजिटिव) आया। बाद में लैब से हुई ब्लड कन्फर्मेटरी जांच में भी उनके नशीले पदार्थ लेने की पुष्टि हो गई। को-पायलट का टेस्ट पूरी तरह निगेटिव रहा। एएआईबी ने अपनी रिपोर्ट में इस स्थिति को सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर चिंता का विषय बताया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से प्राथमिकता के आधार पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की। हालांकि, जांच एजेंसी का कहना है कि हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने और पायलट के ड्रग्स लेने के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है। इस सनसनीखेज घटना के बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने पायलटों का व्यापक ड्रग टेस्ट अभियान शुरू किया है। 17 अगस्त तक करीब 350 पायलटों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 2 अन्य पायलटों के शुरुआती टेस्ट भी नॉन-नेगेटिव आए हैं, जिनकी पुष्टि होना बाकी है। मौजूदा नियमों के तहत एयरलाइंस के लिए 10 प्रतिशत पायलटों की रैंडम ड्रग जांच अनिवार्य है, लेकिन इस घटना के बाद सरकार अब सभी पायलटों की सालाना रैंडम जांच लागू करने पर विचार कर रही है।


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