बिहार सरकार का बड़ा एक्शन, सम्राट चौधरी ने बेऊर जेल के अधीक्षक को किया गया निलंबित
पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित सूबे की सबसे हाई-प्रोफाइल जेल 'केंद्रीय आदर्श कारा, बेऊर' में फैले कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है। बेऊर जेल के भीतर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने और भ्रष्टाचार का संगठित सिंडिकेट चलाने के गंभीर आरोपों के बाद जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बिहार सरकार के गृह विभाग (कारा) की ओर से इस संबंध में देर रात आधिकारिक निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। इस बम्पर कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन से लेकर राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बेऊर जेल में लंबे समय से कैदियों को अवैध सुविधाएं पहुंचाने, जेल मैनुअल के उल्लंघन और अंदरूनी भ्रष्टाचार से जुड़ी कई गोपनीय शिकायतें लगातार सरकार तक पहुंच रही थीं। इन संवेदनशील इनपुट के आधार पर जब उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई, तो कई चौंकाने वाले और गंभीर बिंदु सामने आए। जांच में यह साफ हुआ कि जेल प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों और कुछ रसूखदार कर्मियों की आपसी मिलीभगत से सलाखों के पीछे एक समानांतर और संगठित भ्रष्टाचार का तंत्र (सिंडिकेट) संचालित किया जा रहा था। इस रिपोर्ट के आधार पर सीधे अधीक्षक को जिम्मेदार पाते हुए यह दंडात्मक कदम उठाया गया है। अधीक्षक के निलंबन की इस पटकथा की शुरुआत पिछले शनिवार को ही हो गई थी। उस दिन कारा प्रशासन और पटना जिला प्रशासन की एक संयुक्त भारी-भरकम टीम ने अचानक बेऊर जेल के भीतर एक व्यापक और सघन छापेमारी अभियान चलाया था। इस औचक छापेमारी के दौरान टीम ने जेल के अति-संवेदनशील वार्डों, सेल और प्रशासनिक फाइलों की घंटों गहन जांच की थी। इस दौरान जेल के भीतर से कई ऐसी आपत्तिजनक चीजें और वीआईपी ट्रीटमेंट से जुड़े पुख्ता साक्ष्य हाथ लगने की चर्चा है, जिसके बाद विभागीय स्तर पर निलंबन की फाइल को तेजी से आगे बढ़ाया गया। जेल सूत्रों का दावा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह शुद्धिकरण अभियान केवल जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा तक ही सीमित रहने वाला नहीं है। छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बेऊर जेल के कई अन्य कनिष्ठ अधिकारियों, जेलरों और कक्षपालों (गार्ड्स) की भूमिका की भी बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। बहुत जल्द इस संगठित रैकेट में शामिल कई अन्य कर्मियों पर भी निलंबन और विभागीय जांच की गाज गिरना तय माना जा रहा है। बिहार सरकार लगातार शासन-प्रशासन में शुचिता लाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने विभिन्न मंचों से स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी, चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो। बेऊर जेल के अधीक्षक पर हुआ यह कड़ा एक्शन इसी नीति का सीधा परिणाम माना जा रहा है। इस कार्रवाई से सरकार ने साफ कर दिया है कि अपराधियों को जेल के भीतर किसी भी तरह का संरक्षण या अवैध सुविधा देना अब जेल अधिकारियों को बेहद भारी पड़ने वाला है।