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पुल निर्माण विवाद पर बड़ा एक्शनः उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निलंबित अभियंता को नहीं दी राहत! विपक्षियों से 3 सप्ताह में मांगा जवाब, अगली सुनवाई तय

editor
  • Awaaz Desk
  • March 27, 2026 11:03 AM
 Major action in the bridge construction dispute: The Uttarakhand High Court denied relief to the suspended engineer! Opponents are asked to respond within three weeks, and the next hearing is scheduled.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून जिले के सौड़ में बनाए जा रहे पुल के निर्माण में अनियमितताओं के चलते डिमोशन पर भेजे गए अभियंता के द्वारा पुल के निर्माण में रेत की जगह मिट्टी का उपयोग करने के बाद उसे सस्पेंड करने के मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने फिलहाल उसे कोई राहत न देते हुए विपक्षियों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। आज हुई सुनवाई पर विपक्षियों की तरफ से कहा गया कि पुल के निर्माण में रेत की जगह मिट्टी मिलाई जा रही थी। जिसके बाद ग्रामीणों द्वारा इसका विरोध किया गया। साथ में उसका वीडियो भी बनाया है। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने पुल का निर्माण कर रही कंपनी ब्रीडकुल से की गई, जिसपर कार्यवाही करते हुए कंपनी ने अभियंता अजय कुमार को सस्पेंड कर दिया। याचिका में कहा गया है कि अभियंता द्वारा पुल के निर्माण में रेत की जगह मिट्टी का उपयोग करने पर आम जनता की भविष्य पर खिलवाड़ किया गया। पुल का कार्य पूर्ण होने के बाद बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। याचिकाकर्ता द्वारा अपने बर्खास्तगी के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है, जिसमें कहा गया कि उनका निलंबन आदेश केंद्रीय प्रशासनिक नियमावली के विरुद्ध है। कंपनी को बर्खास्त करने के अधिकार नहीं है। वे डेपूटेशन पर आये थे उनकी नियुक्ति लोक निर्माण विभाग के द्वारा की गयी है। उसे ही यह अधिकार है, न कि कंपनी को। इसलिए उन्हें बहाल किया जाए। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें फिलहाल कोई राहत न देकर जवाब पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि आम जनता के भविष्य का ध्यान रखना कोर्ट का कर्तव्य है।


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