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भोजपुर एनकाउंटर पर बड़ा एक्शन: शाहपुर थानाध्यक्ष और दो दारोगा समेत कई पुलिसकर्मी सस्पेंड, फोरलेन पर लाठीचार्ज से भड़का आक्रोश

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 18, 2026 08:06 AM
Major action regarding the Bhojpur encounter: Several police personnel, including the Shahpur Station House Officer (SHO) and two Sub-Inspectors, have been suspended; a lathi-charge on the four-lane highway sparked public outrage.

आरा। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में घायल हुए युवक भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद समूचा इलाका सुलग उठा है। मामले की संवेदनशीलता और जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही को देखते हुए पुलिस महकमे ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश ने भोजपुर एसपी राज की अनुशंसा पर शाहपुर थानाध्यक्ष (एसएचओ) राजेश कुमार मलाकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, एनकाउंटर के वक्त ड्यूटी पर मौजूद एक सब-इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर और कई सिपाही भी सस्पेंड कर दिए गए हैं।

इस पूरी घटना के बाद मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने पुलिसिया कार्रवाई पर बेहद गंभीर और संगीन सवाल खड़े किए हैं। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने थाने की संवेदनहीनता को उजागर करते हुए बताया "मेरा बेटा अपराधी नहीं था, उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। मैं खुद थाने गया था और पुलिसवालों से हाथ जोड़कर कहा था कि मेरे बेटे का दिमागी संतुलन खराब है, आप लोग उसे किसी तरह बस कंट्रोल (काबू) कर लीजिए। लेकिन मेरी बात सुनने के बजाय पुलिस ने मुझे सुबह से शाम तक थाने में ही बैठाकर रखा और इधर मेरे बेटे का एनकाउंटर कर दिया। पुलिस कहती रही कि सिर्फ पैर में गोली लगी है, वह जिंदा है, लेकिन उसे तो मार डाला गया। क्या इतनी बड़ी पुलिस फोर्स एक विक्षिप्त को जिंदा नहीं पकड़ सकती थी? वहीं मृतक की मां आशा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया था, उसके बावजूद उसे बेहद करीब से गोली मारी गई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का कोई आपराधिक इतिहास (ट्रैक रिकॉर्ड) नहीं था, बस उसे मानसिक बीमारी के कारण गुस्सा जल्दी आ जाता था। युवक की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उग्र ग्रामीणों और परिजनों ने मृतक के शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन (राष्ट्रीय राजमार्ग) को पूरी तरह जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान भीड़ को तितर-बितर करने और यातायात बहाल कराने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई और ग्रामीण अधिक उग्र हो गए। फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर भरत भूषण का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह हथियार के साथ नजर आ रहा था। इसी वीडियो की सत्यता की जांच करने शाहपुर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम बिलौटी गांव स्थित उसके घर पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि वहां पहुंचते ही भरत भूषण ने पुलिस टीम पर पिस्तौल तान दी। काफी देर तक चली बहस के बाद उसने पुलिस पर फायरिंग झोंक दी, जिसके जवाब में पुलिस को भी आत्मरक्षार्थ गोलियां चलानी पड़ीं। पुलिस की गोली से घायल भरत को इलाज के लिए पटना भेजा गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। फिलहाल, परिजनों की मांग पर मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जा रही है।


 


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