बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 10 आईएएस समेत 21 टॉप अधिकारियों के तबादले,मुजफ्फरपुर-सुपौल समेत 7 जिलों को मिले नए डीडीसी
पटना। बिहार सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक गतिशील, पारदर्शी और कार्यकुशल बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर नौकरशाही में फेरबदल किया है। सरकार ने एक साथ 21 शीर्ष अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल फेरबदल में 10 भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी और बिहार प्रशासनिक सेवा के 11 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। शुक्रवार की देर रात सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य के सात जिलों में नए उप विकास आयुक्तों की तैनाती की गई है। इन सभी नव-नियुक्त डीडीसी को संबंधित जिलों के जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं को धरातल पर तेजी से उतारा जा सके।
स्थानीय विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने इन अधिकारियों को कमान सौंपी है। जिलों के अलावा, पटना सचिवालय और विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी विभागों में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें कई नव-प्रोन्नत अधिकारी भी शामिल हैं। नव प्रोन्नत हेमंत कुमार सिंह को आयोग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। संजय कुमार को अपर सचिव और शाहिद परवेज को विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदीप सिंह को नया प्रबंध निदेशक बनाया गया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। सारा अशरफ को निदेशक का पद सौंपा गया है। विदुभूषण चौधरी और मनोज कुमार को अपर सचिव नियुक्त किया गया है। मनोरंजन कुमार को निदेशक बनाया गया है। डॉ. गगन को नया नगर आयुक्त बनाया गया है। स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को फील्ड में भेजा गया है। अभिषेक आनंद को पूर्णिया का नया जिला परिवहन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। आनंद उत्सव को मुजफ्फरपुर पूर्वी का अनुमंडल पदाधिकारी बनाया गया है। कुमार गौरव को झंझारपुर का अनुमंडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। इस व्यापक फेरबदल के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य अनुभवी और युवा अधिकारियों के तालमेल (मिश्रण) से जनसेवा को बेहतर बनाना है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से लटकी हुई विकास योजनाओं में तेजी आएगी। तबादले के तुरंत बाद सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे बिना समय गंवाए अपने नए पदस्थापन स्थान पर फौरन योगदान दें, ताकि प्रशासनिक कामकाज में किसी भी प्रकार का गतिरोध या रुकावट पैदा न हो। जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल का आने वाले समय में जिलों के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।