झारखंड के संगठित अपराध को बड़ा झटका: अमन साहू के बाद अब सुजीत सिन्हा का अंत, कस्टडी से भागते वक्त एनकाउंटर में ढेर हुआ गैंगस्टर
रांची। झारखंड में संगठित अपराध और खौफ के पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा पूरी तरह कस गया है। राज्य में अपराध के एक और काले अध्याय का अंत करते हुए पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को जामताड़ा में हुई एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। पुलिस कस्टडी से फरार होने की कोशिश के दौरान हुई इस कार्रवाई से झारखंड के अंडरवर्ल्ड को सबसे बड़ा झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू भी इसी अंदाज में पुलिस कस्टडी से भागने के दौरान मारा गया था। सुजीत सिन्हा राज्य का दूसरा ऐसा बड़ा गैंगस्टर है, जो कस्टडी ट्रांजिट के दौरान एनकाउंटर में मारा गया।
झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच राज्य के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल ले जाते समय उसने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने और फायरिंग करने का प्रयास किया, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इस घटना के साथ ही झारखंड के अपराध जगत के एक और बड़े नाम का अंत हो गया। सुजीत सिन्हा की मौत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले मार्च 2025 में कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू भी पुलिस कस्टडी के दौरान हुई मुठभेड़ में मारा गया था। दोनों घटनाओं में समानता यह रही कि दोनों अपराधियों की मौत पुलिस ट्रांजिट के दौरान हुई और दोनों मामलों में पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई का दावा किया। पुलिस के मुताबिक, सुजीत सिन्हा को सुरक्षा कारणों से साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित किया जा रहा था। जामताड़ा के पास पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया। जवान जब उसे दूसरी गाड़ी में बैठा रहे थे, तभी उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीन ली और गोली चलाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने तत्काल जवाबी फायरिंग की, जिसमें वह मारा गया। इससे पहले 11 मार्च 2025 को अमन साहू को रायपुर से रिमांड पूरी होने के बाद एटीएस की सुरक्षा में रांची लाया जा रहा था। पलामू के पास पुलिस का दावा था कि उसके गुर्गों ने हमला कर उसे छुड़ाने की कोशिश की। इसी दौरान हुई गोलीबारी में अमन साहू की मौत हो गई थी। उस घटना ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े किए थे और अब सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के बाद एक बार फिर ऐसी घटनाएं चर्चा में हैं। झारखंड पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, अमन साहू और सुजीत सिन्हा कभी राज्य के सबसे प्रभावशाली आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा माने जाते थे। शुरुआती दौर में दोनों ने मिलकर रंगदारी, ठेकेदारी और संगठित अपराध की कई वारदातों को अंजाम दिया। हालांकि समय के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़े और उन्होंने अलग-अलग गिरोह बना लिए। अमन साहू के एनकाउंटर के बाद उसके गिरोह की कमान राहुल सिंह के हाथों में चली गई, जबकि सुजीत सिन्हा ने धनबाद के कुख्यात प्रिंस खान गिरोह के साथ गठजोड़ कर लिया। पुलिस का आरोप है कि दोनों गिरोह मिलकर रंगदारी वसूली, ठेकेदारों को धमकाने और संगठित अपराध की कई घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। सुजीत सिन्हा पर हत्या, रंगदारी, फायरिंग, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस का दावा है कि जेल में बंद रहने के बावजूद वह मोबाइल फोन और अपने गुर्गों के जरिए गिरोह का संचालन कर रहा था। इसी नेटवर्क की जांच के दौरान रांची पुलिस ने इसी वर्ष उसकी पत्नी रिया सिन्हा को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, वह गिरोह की गतिविधियों में सहयोग करने और नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभा रही थी। अमन साहू और अब सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के बाद झारखंड के संगठित अपराध जगत को बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, इन दोनों घटनाओं ने पुलिस सुरक्षा, जेल ट्रांजिट व्यवस्था और एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल भी खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां यह भी आकलन कर रही हैं कि इन दोनों गैंगस्टरों के खत्म होने के बाद राज्य में अपराध जगत का नया समीकरण क्या होगा।