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रुद्रपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी: एनसीईआरटी फर्जी किताब मामले का मास्टरमाइंड नफीस गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला था जाल

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 04, 2026 01:04 PM
Major Breakthrough for Rudrapur Police: Nafees, the Mastermind Behind the Fake NCERT Book Racket, Arrested; Network Spanned Across Several States.

रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में करोड़ों रुपये के फर्जी एनसीईआरटी  किताब घोटाले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने दबोच लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना नफीस खान उर्फ राजू को पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद 3 अप्रैल को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। इस गिरोह का नेटवर्क उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा तक फैला हुआ था। इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ बीती 17 मार्च को हुआ था। एनसीईआरटी  नई दिल्ली के सहायक उत्पादन अधिकारी दीपक कुमार ने रुद्रपुर कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि बाजार में बड़े पैमाने पर नकली एनसीईआरटी पुस्तकें बेची जा रही हैं। पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें मेरठ निवासी नफीस खान का नाम गिरोह के मुख्य संचालक के रूप में सामने आया। हालांकि, शुरुआती छापेमारी के दौरान कई साथी पकड़े गए थे, लेकिन नफीस लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था।

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। नफीस एक संगठित सिंडिकेट चला रहा था। वह उत्तर प्रदेश के बरेली (भोजीपुरा) में नकली पुस्तकें तैयार करवाता था, जिन्हें रुद्रपुर के कीरतपुर स्थित गुप्त गोदामों में डंप किया जाता था। किताबों के कवर और फिनिशिंग का काम मथुरा की प्रिंटिंग प्रेसों में होता था। इसके बाद तैयार माल को राजस्थान के भरतपुर स्थित बड़े गोदामों में भेजा जाता था, जहां से पूरे उत्तर भारत के बुक स्टोरों पर इनकी सप्लाई की जाती थी। नफीस खुद ही गोदामों का किराया वहन करता था और परिवहन के लिए सीधे वाहन मालिकों से संपर्क करता था ताकि पहचान छिपी रहे। गिरफ्तार आरोपी नफीस खान आदतन अपराधी है और पहले भी जेल जा चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2020 में मेरठ के परतापुर थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कॉपीराइट अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। वहीं, 2023 में वह बरेली के भोजीपुरा थाने से इसी तरह के अपराध में जेल की हवा खा चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नफीस को न्यायालय में पेश कर दिया गया है। मामले में शामिल कुछ अन्य फरार आरोपियों की तलाश के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर इसे पूरी तरह खत्म किया जाएगा। इस कामयाबी से फर्जी पब्लिशर्स के बीच हड़कंप मचा हुआ है।


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