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उत्तराखंड पंचायतीराज एक्ट में बड़े बदलाव की तैयारी: अब बीडीओ नहीं,एडीओ पंचायत होंगे क्षेत्र पंचायतों के 'बॉस'

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 28, 2026 06:05 AM
Major Changes Planned for Uttarakhand Panchayati Raj Act: No Longer the BDO—the ADO (Panchayat) Will Now Be the 'Boss' of Area Panchayats.

देहरादून। उत्तराखंड में ग्रामीण विकास की धुरी और त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में धामी सरकार एक ऐतिहासिक प्रशासनिक फेरबदल करने जा रही है। सरकार 'उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम-2016' में बड़ा संशोधन करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। इस नए बदलाव के तहत अब प्रदेश की क्षेत्र पंचायतों में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की जगह सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत) को क्षेत्र पंचायत का पदेन सचिव (सचिव) नियुक्त किया जाएगा। पंचायतीराज विभाग द्वारा तैयार किए गए इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी के लिए जल्द ही प्रदेश कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

पंचायतीराज विभाग के सचिव मदन कौशिक के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ करना और पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली केंद्रीय व राज्य वित्त की धनराशि का शत-प्रतिशत व सही सदुपयोग सुनिश्चित करना है। वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, राज्य के सभी 95 विकासखंडों (ब्लॉकों) में तैनात खंड विकास अधिकारी ही क्षेत्र पंचायतों के सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। चूँकि बीडीओ मूल रूप से ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उनके पास पहले से ही मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और विभिन्न प्रशासनिक व कानून-व्यवस्था संबंधी कार्यों का अत्यधिक दबाव रहता है। इस अतिरिक्त बोझ के कारण बीडीओ अक्सर पंचायतों के नियमित विकास कार्यों, बैठकों और वित्तीय योजनाओं की बारीकी से निगरानी नहीं कर पाते थे। कई बार प्रशासनिक व्यस्तता के चलते वे पंचायत कार्यों में अपेक्षित रुचि भी नहीं ले पाते थे, जिससे विकास योजनाएं समय पर धरातल पर नहीं उतर पा रही थीं। विभागीय अधिकारियों और त्रिस्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट मानना है कि एडीओ पंचायत का पूरा फोकस और प्रशिक्षण केवल पंचायतीराज व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए होता है। ऐसे में यदि उन्हें क्षेत्र पंचायत सचिव की कमान सौंपी जाती है,तो स्थानीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और फाइलों के निस्तारण में तेजी आएगी। पंचायत स्तर पर होने वाले वित्तीय खर्चों की निगरानी और बेहतर ऑडिटिंग हो सकेगी। ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों के बीच समन्वय सुधरेगा और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय होगी। राज्य में कुल 95 विकासखंड हैं, जहां अभी 95 बीडीओ तैनात हैं। क्षेत्र पंचायतों में सहायक विकास अधिकारी पंचायत के कुल 95 पद सृजित हैं। वर्तमान में इनमें से 88 पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 7 पद रिक्त चल रहे हैं। जमीनी स्तर पर कार्य देखने वाले कुल 1,175 पदों में से 1,078 जीपीडीओ वर्तमान में कार्यरत हैं और 97 पद खाली हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड को छोड़कर देश के अधिकांश राज्यों में पहले से ही एडीओ पंचायत ही क्षेत्र पंचायत के सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राज्य के पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि उत्तराखंड में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाए, जिसे अब सरकार धरातल पर उतारने की तैयारी में है।


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