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उत्तराखण्ड में बच्चा तस्करी का बड़ा भंडाफोड़: महिलाओं की मदद से बच्चों को फंसाता था गैंग, फिर लाखों में होती थी खरीद-फरोख्त; पूछताछ में सामने आए कई चौंकाने वाले राज

editor
  • Awaaz Desk
  • June 10, 2026 10:06 AM
Major child trafficking bust in Uttarakhand: Gang used women to lure children, then traded them for lakhs; interrogation reveals shocking details.

हरिद्वार। उत्तराखण्ड पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मात्र 72 घंटे के भीतर अंतरराज्यीय बच्चा चोरी गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। कनखल क्षेत्र से अगवा की गई तीन वर्षीय मासूम बच्ची को सकुशल बरामद करने के साथ ही पुलिस ने दो महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली से चोरी किए गए एक अन्य बच्चे को भी सुरक्षित मुक्त कराया गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह संगठित गिरोह उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में सक्रिय था तथा चोरी किए गए बच्चों को निसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचने का धंधा करता था। मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में पूरे मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि 6 जून को कनखल थाना क्षेत्र के बैरागी कैंप स्थित झुग्गी बस्ती से एक तीन वर्षीय बच्ची का अपहरण कर लिया गया था। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल विशेष टीमों का गठन कर जांच शुरू की। सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी संदिग्धों की पहचान का प्रयास किया गया। जांच में सामने आया कि मासूम बच्ची को बिस्किट का लालच देकर झुग्गी से बाहर बुलाया गया और फिर उसे अगवा कर लिया गया। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शुरू से ही यह मान लिया था कि मामला फिरौती का नहीं, बल्कि बच्चा चोरी गिरोह से जुड़ा हो सकता है। इसी दिशा में जांच आगे बढ़ाई गई। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के दौरान पता चला कि चार जून को नई दिल्ली क्षेत्र से भी एक वर्षीय बच्चे का अपहरण हुआ था। जब दोनों मामलों की सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया गया तो कई चेहरे समान पाए गए। इसके बाद पुलिस को यकीन हो गया कि दोनों वारदातों के पीछे एक ही संगठित गिरोह सक्रिय है। लगातार की गई जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए। आरोपियों ने बताया कि चोरी किए गए बच्चों की कीमत दो लाख से पांच लाख रुपये तक तय की जाती थी।

गिरोह में हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई बच्चों की रेकी करता था, कोई अपहरण करता था, कोई ग्राहकों की तलाश करता था और कुछ आरोपी फर्जी माता-पिता बनकर बच्चों को बेचने का काम करते थे। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला आरोपी प्रीति शर्मा और मोहम्मद आकिल बच्चों की कीमत तय करने और उन्हें बेचने का काम करते थे। ये लोग बच्चों को अपना या अनाथ बताकर निसंतान दंपतियों के हाथों बेच देते थे। गिरोह की जड़ें उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखण्ड तक फैली हुई पाई गई हैं। उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश में पुलिस की लगातार दबिश से घबराए गिरोह के अन्य सदस्यों ने अपहृत बच्ची को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़ दिया और फरार हो गए। रेलवे सुरक्षा बल से सूचना मिलने के बाद हरिद्वार पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया। पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह ने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब डेढ़ वर्ष के एक अन्य बच्चे का भी अपहरण किया था। आरोपी उस बच्चे का डेढ़ लाख रुपये में सौदा कर उसे बदायूं में बेच चुके थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उस बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि हरिद्वार से अगवा की गई बच्ची को राजस्थान में बेचने की तैयारी चल रही थी। हालांकि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए पूरी साजिश को नाकाम कर दिया और सभी प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद आकिल, नसीमा, जुल्फेकार, धर्मेन्द्र कुमार, प्रीति शर्मा तथा शिवा सिंह उर्फ गौरव शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में गिरोह के छह सदस्य सामने आए हैं, लेकिन संभावना है कि इसके तार अन्य राज्यों में सक्रिय बड़े नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी कारण मामले की जांच अभी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों का भी सहयोग लिया जाएगा।


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