• Home
  • News
  • Major decision by the Bihar government: A ₹20 crore gift for East Champaran; the world-famous Kesaria Stupa and Sitakund Dham will be transformed and developed into global tourism hubs.

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: पूर्वी चंपारण को ₹20 करोड़ की सौगात,विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप और सीताकुंड धाम का बदलेगा स्वरूप, बनेंगे वैश्विक पर्यटन केंद्र

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 06, 2026 09:07 AM
Major decision by the Bihar government: A ₹20 crore gift for East Champaran; the world-famous Kesaria Stupa and Sitakund Dham will be transformed and developed into global tourism hubs.

पूर्वी चंपारण को बिहार और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई व भव्य पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप और ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व वाले सीताकुंड धाम के कायाकल्प के लिए बिहार सरकार ने करीब 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विकास योजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन दोनों प्रमुख स्थलों को 'मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना' और पर्यटन विकास की मुख्य योजनाओं से जोड़ा गया है। इस पहल से जहाँ अंतरराष्ट्रीय और धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व रफ्तार मिलेगी, वहीं स्थानीय महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।

दुनिया के सबसे ऊंचे और विशाल बौद्ध स्तूपों में शुमार केसरिया स्तूप को अब लगभग 75 एकड़ के विशाल क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत ₹19.77 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक पर्यटकीय सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। इस योजना के तहत यहाँ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आधुनिक कैफेटेरिया, एक सर्वसुविधायुक्त 'टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर' (पर्यटक सुविधा केंद्र), विशाल पार्किंग और सुंदर लैंडस्केपिंग का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, इस परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ बनने वाली दुनिया के आठ प्रमुख बौद्ध स्थलों की अद्भुत प्रतिकृतियां (रिप्लिका) होंगी, जिससे बौद्ध भिक्षु और सैलानी एक ही स्थान पर संपूर्ण बौद्ध विरासत की झलक देख सकेंगे। केसरिया स्तूप के साथ-साथ जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक आस्था के केंद्र 'सीताकुंड धाम' के सर्वांगीण विकास के लिए भी पर्यटन विभाग ने प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस धार्मिक स्थल को संवारने के लिए यहाँ एक बेहद भव्य और कलात्मक प्रवेश द्वार, विशाल मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं के ठहरने व बुनियादी ढाँचे से जुड़ी अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं के विस्तार से यहाँ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम हो सकेगी। इस पूरी विकास गाथा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्थानीय निवासियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए 'मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना' को धरातल पर उतारा जा रहा है। पर्यटन स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले ग्रामीण या शहरी निवासी अपने घरों के कमरों को पर्यटकों के ठहरने (होमस्टे) के लिए विकसित कर सकते हैं। इसके लिए सरकार प्रति कमरा ₹2.50 लाख की भारी सब्सिडी देगी। एक लाभार्थी अधिकतम 4 कमरों के लिए कुल ₹10 लाख तक का सरकारी अनुदान प्राप्त कर सकता है।स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रति कमरा ₹25,000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी देगी। बिहार सरकार का मानना है कि इस योजना से चंपारण की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, चंपारणी हस्तशिल्प और लोक कलाओं को वैश्विक मंच मिलेगा। पर्यटकों के आगमन से स्थानीय स्तर पर गाइड, होटल प्रबंधन, परिवहन, और हस्तशिल्प से जुड़े रोजगारों में भारी उछाल आएगा, जिससे पूर्वी चंपारण की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और युवाओं का पलायन थमेगा।


संबंधित आलेख: