बाजार में बड़ा उलटफेर: ₹1.50 लाख से नीचे लुढ़का सोना,चांदी भी ₹2.35 लाख के करीब
नई दिल्ली। सर्राफा बाजार में निवेश करने वालों और आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लेकर भारतीय घरेलू बाजार तक सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक मंदी के संकेत, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण कीमती धातुओं पर दबाव काफी बढ़ गया है। इसी का नतीजा है कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना ₹1.50 लाख के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है, वहीं चांदी भी ₹2.35 लाख के स्तर के पास आ गई है। इस महीने अब तक सोने में करीब 3.44 फीसदी और चांदी में 11.32 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। आइए, सेबी रजिस्टर्ड मार्केट और कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के विश्लेषण के आधार पर समझते हैं इस गिरावट के पीछे के 4 बड़े कारण और आगे का टारगेट।
एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से बाजार को उम्मीद है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसे में निवेशकों का रुझान सोने से हटकर अमेरिकी डॉलर की तरफ बढ़ रहा है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव है। हैरान करने वाली बात यह है कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव के बावजूद सोना अपनी पारंपरिक "सेफ हेवन" (सुरक्षित निवेश) की भूमिका नहीं निभा पा रहा है। इसका बड़ा कारण मांग में भारी कमी है। पिछले महीने चीन ने सिर्फ 8 टन सोना खरीदा, जबकि भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग में करीब 70 फीसदी की भारी गिरावट आई है। ग्लोबल स्तर पर निवेशक गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ से लगातार चौथे सप्ताह निकासी हुई है और लगभग 2.71 अरब डॉलर बाहर निकाले जा चुके हैं। दुनिया भर के शेयर बाजारों और क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में आई गिरावट के कारण निवेशकों को 'मार्जिन कॉल' का सामना करना पड़ा। इस नुकसान की भरपाई के लिए निवेशकों ने कमोडिटी बाजार में भी भारी बिकवाली (प्रॉफिट बुकिंग) शुरू कर दी। अनुज गुप्ता के अनुसार, हालिया गिरावट पूरी तरह तकनीकी ब्रेकडाउन और नकारात्मक फंडामेंटल संकेतों का परिणाम है। तकनीकी चार्ट्स पर अब सोने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,100 से 4,000 डॉलर का स्तर एक मजबूत सपोर्ट है, जो भारतीय करेंसी के लिहाज से ₹1.22 लाख प्रति 10 ग्राम बैठता है। वहीं, चांदी के लिए वैश्विक बाजार में 60 से 56 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट है, जो भारतीय बाजार के अनुसार ₹1.71 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 2 से 3 महीने तक सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि, लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। निवेशकों को इस गिरावट पर 'बाय ऑन डिप्स' यानी चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। आगे चलकर जैसे ही त्योहारी सीजन शुरू होगा, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी दोबारा लौटेगी और भविष्य में ब्याज दरों में नरमी आएगी, सोने-चांदी को फिर से बड़ा सपोर्ट मिलेगा और कीमतें दोबारा रफ्तार पकड़ेंगी।