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ऋषिकेश में बड़ा रेल हादसा टला: योग नगरी स्टेशन के पास उज्जैनी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे और इंजन पटरी से उतरे, तेज धमाके से दहला खांड गांव

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 19, 2026 10:05 AM
Major Rail Disaster Averted in Rishikesh: 3 Coaches and Engine of Ujjaini Express Derail Near Yog Nagari Station; Khand Village Rocked by Loud Bang

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के योग नगरी रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार रात एक बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया। खांड गांव क्षेत्र के पास रात करीब 9:30 बजे उज्जैनी एक्सप्रेस का खाली रैक अचानक पटरी से उतरकर (डिरेल) दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेन का भारी-भरकम इंजन और तीन बोगियां पटरी से उतरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत यह रही कि यह रैक मेंटेनेंस (मरम्मत) के लिए जा रहा था और पूरी ट्रेन खाली थी, अन्यथा सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। सोमवार की शांत रात अचानक एक खौफनाक और गगनभेदी धमाके से गूंज उठी। खांड गांव के निवासियों के अनुसार, रात साढ़े नौ बजे हुए इस धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि लोग दहशत में आ गए और अपने घरों से बाहर की तरफ भागे। शुरुआत में ग्रामीणों को लगा कि पास की पहाड़ियों में कोई बड़ा बारूदी ब्लास्ट हुआ है, लेकिन जब रेलवे ट्रैक की तरफ चीख-पुकार और हलचल बढ़ी, तो माजरा समझ में आया। देखते ही देखते घटनास्थल पर सैकड़ों स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस हादसे ने रेलवे की सुरक्षा और संचालन प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। रेलवे प्रशासन की ओर से शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी और ब्रेक फेल होने की दलील दी जा रही है, लेकिन स्थानीय लोग और विशेषज्ञ इस थ्योरी को पचा नहीं पा रहे हैं।

आमतौर पर जब किसी ट्रेन को मेंटेनेंस या शंटिंग (ट्रैक बदलने) के लिए ले जाया जाता है, तो इंजन अकेले या बेहद सीमित रैक के साथ आगे बढ़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पूरी की पूरी बोगियों से भरी ट्रेन को इस तरह क्यों ले जाया जा रहा था? क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई? हादसे के बाद से ही इस बात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि दुर्घटना के वक्त इंजन के भीतर लोको पायलट (ड्राइवर) मौजूद था या नहीं। देर रात तक रेलवे के उच्च अधिकारियों की तरफ से इस विषय पर कोई आधिकारिक और स्पष्ट बयान सामने नहीं आया, जिससे अफवाहों का बाजार गर्म रहा। इसके अलावा, रेलवे के आपदा प्रबंधन की सुस्ती भी इस घटना में खुलकर सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हादसे के करीब ढाई घंटे बाद तक भी रेलवे का कोई बड़ा जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। केवल राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और निचले स्तर के कर्मचारी ही स्थिति को संभालते नजर आए। हादसे की खबर आग की तरह फैली और कुछ ही देर में ट्रैक के दोनों ओर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस गंभीर स्थिति में भी कई लोग अपने मोबाइल फोन से वीडियो और सोशल मीडिया रील्स बनाते नजर आए। जीआरपी के जवानों को भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें सुरक्षित दूरी पर हटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल, रेलवे की तकनीकी टीम क्रेन और आधुनिक उपकरणों की मदद से पटरी से उतरे भारी डिब्बों और क्षतिग्रस्त इंजन को हटाने के काम में जुटी हुई है ताकि रूट को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि अगर यह यात्री ट्रेन होती, तो देश को एक भीषण रेल त्रासदी का सामना करना पड़ सकता था। मामले की उच्च स्तरीय जांच तय मानी जा रही है।
 


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