महारिकॉर्ड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रचा इतिहास, बने उत्तराखंड के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में आज का दिन (शुक्रवार, 10 जुलाई 2026) इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। सूबे के युवा और कर्मठ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। सीएम धामी ने उत्तराखंड की राजनीति के पुरोधा और विकास पुरुष कहे जाने वाले स्वर्गीय नारायण दत्त (एनडी) तिवारी का 20 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। नारायण दत्त तिवारी उत्तराखंड के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया था और वह कुल 1831 दिनों तक इस पद पर रहे थे। लेकिन, आज शुक्रवार 10 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल को 1832 दिन पूरे हो गए हैं, जिसके साथ ही वे सूबे में सबसे लंबे समय तक सत्ता की कमान संभालने वाले इकलौते मुख्यमंत्री बन गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए जुलाई का यह महीना रिकॉर्डों की बौछार लेकर आया है। उन्होंने महज 5 दिनों के भीतर दो बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं। चार जुलाई को पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के इतिहास में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पहले मुख्यमंत्री बने थे। आज उन्होंने एनडी तिवारी के 1831 दिनों के कार्यकाल को पीछे छोड़कर राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का सर्वकालिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। साल 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर बने उत्तराखंड राज्य में अब तक मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल काफी उथल-पुथल भरा रहा है। राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के मिथक को तोड़ते हुए धामी ने यह मुकाम हासिल किया है। कांग्रेस ने अब तक राज्य को तीन मुख्यमंत्री दिए है। एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत। इनमें से केवल एनडी तिवारी ही अपना 5 साल का कार्यकाल (2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007) पूरा कर पाए थे। बाकी दोनों नेता एक ही कार्यकाल में अपनी कुर्सी गंवा बैठे थे। जबकि भाजपा ने राज्य को अब तक 7 मुख्यमंत्री दिए हैं। इनमें नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह सफर आसान नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने छात्र राजनीति से तपने के बाद यह मुकाम हासिल किया है। धामी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे एबीवीपी के उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव रहे और वहां एक ऐतिहासिक महासम्मेलन का सफल आयोजन कर अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद, वह दो बार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद उनका चुनावी सफर इस तरह आगे बढ़ा। 2012 भाजपा ने पहली बार खटीमा विधानसभा सीट से टिकट दिया, जहां से वे जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। 2017 खटीमा की जनता ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और वे दूसरी बार विधायक बने। 2021 तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद 4 जुलाई 2021 को हाईकमान ने अप्रत्याशित रूप से पुष्कर सिंह धामी को सूबे की कमान सौंपकर सबको चौंका दिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, लेकिन धामी अपनी पारंपरिक सीट खटीमा से चुनाव हार गए। इसके बावजूद, उनके कुशल नेतृत्व को देखते हुए भाजपा ने 'हारे हुए सेनापति' पर दोबारा दांव लगाया। बाद में धामी ने चंपावत सीट से रिकॉर्ड मतों से उपचुनाव जीता और दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। आज धामी न केवल भाजपा के सबसे भरोसेमंद चेहरे बन चुके हैं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में 'स्थिरता' और 'रिकॉर्ड' के नए पर्याय के रूप में उभरे हैं।