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उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले का बड़ा खुलासा: 19 शिक्षण संस्थानों पर एफआईआर, करोड़ों की गड़बड़ी की जांच को एसआईटी गठित

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 13, 2026 10:07 AM
Major revelation regarding the scholarship scam in Uttarakhand: FIRs lodged against 19 educational institutions; SIT constituted to probe irregularities worth crores.

हरिद्वार। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना में कथित वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) की जांच में संदिग्ध पाए गए हरिद्वार जिले के 19 स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला वर्ष 2021-22 और 2022-23 में अल्पसंख्यक छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति से संबंधित है। आरोप है कि संबंधित शिक्षण संस्थानों ने छात्रवृत्ति योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन का दुरुपयोग और गबन किया। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इप्सिता रावत ने एसएसपी हरिद्वार को शिकायत भेजी थी, जिसके आधार पर सिडकुल थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार, हरिद्वार जिले में अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति लेने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई। जांच के दौरान कई संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने पर मामला गंभीर माना गया।

भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के छात्रवृत्ति प्रभाग ने 21 मार्च 2025 को उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान संदिग्ध पाए गए संस्थानों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तराखंड शासन के अल्पसंख्यक कल्याण अनुभाग ने 19 मई 2025 को सभी जिलाधिकारियों को जांच कर दोषी पाए जाने पर विधिक कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। निर्देशों के अनुपालन में तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार ने 24 मई 2025 को उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया। भगवानपुर, लक्सर, हरिद्वार और रुड़की के उपजिलाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जांच कर जून 2025 में रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। इन रिपोर्टों में कई संस्थानों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने की बात कही गई। इन्हीं जांच रिपोर्टों के आधार पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इप्सिता रावत ने संबंधित 19 शिक्षण संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किया जाना आवश्यक है। एफआईआर जिन संस्थानों पर दर्ज की गई है, उनमें गॉड ब्लेस पब्लिक स्कूल, एम.जी. पब्लिक स्कूल, ए.एस.एन. इंटर कॉलेज, सैनी प्राइवेट आईटीआई, जय भारती प्राइवेट आईटीआई, एसबीएन प्राइवेट आईटीआई, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, विश्व भारती पब्लिक स्कूल, मदरसा नूर-ए-हसन, जय भारत पीएस, हन्नू आईटीआई, रेडियंस एकेडमी, रामतीर्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महर्षि दयानंद प्राइवेट आईटीआई, संस्कृति पब्लिक स्कूल, फोनिक्स स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड बिजनेस, एसडीपीसी गर्ल्स इंटर कॉलेज तथा ओम इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन शामिल हैं। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि मामला करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति से जुड़ा हो सकता है। इसकी निष्पक्ष और गहन जांच के लिए सीओ सदर एसपी बलूनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य में छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सरकारी धन के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
 


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