झारखंड के प्रारंभिक शिक्षकों को बड़ा झटका: एसीपी-एमएसीपी का लाभ नहीं मिलेगा, सरकार के फैसले पर शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालयों के हजारों शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें एसीपी और एमएसीपी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रारंभिक शिक्षकों के लिए पहले से अलग प्रोन्नति और वेतनमान उन्नयन की व्यवस्था लागू है। इसलिए उन्हें एसीपी और एमएसीपी का लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं बनता। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।
यह निर्णय झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया है। दरअसल, कुछ प्रारंभिक शिक्षकों ने अदालत में याचिका दायर कर अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह एसीपी और एमएसीपी का लाभ देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे मामले की समीक्षा कर निर्धारित समय के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की। समिति में वित्त विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया। समिति ने शिक्षकों की सेवा शर्तों, प्रोन्नति नियमों, वित्तीय प्रावधानों और मौजूदा नीतियों का विस्तृत अध्ययन किया। जांच के बाद समिति ने निष्कर्ष निकाला कि प्रारंभिक शिक्षकों के लिए पहले से ही अलग प्रोन्नति व्यवस्था प्रभावी है। विभाग ने बताया कि पहले वर्ष 1993 की प्रोन्नति नियमावली लागू थी, जबकि अब झारखंड राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली-2025 प्रभावी है। इस नई नियमावली के तहत शिक्षकों को निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने पर क्रमिक पदोन्नति और उच्चतर वेतनमान देने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि यही व्यवस्था शिक्षकों के वित्तीय उन्नयन के लिए पर्याप्त है। सरकारी आदेश में वित्त विभाग के उस नियम का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार जिन संवर्गों के लिए अलग प्रोन्नति योजना लागू होती है, उन्हें एसीपी और एमएसीपी योजना का लाभ नहीं दिया जाता। सरकार के अनुसार प्रारंभिक शिक्षक इसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन्हें इन योजनाओं के दायरे में शामिल नहीं किया जा सकता। सरकार के इस फैसले का झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ के प्रतिनिधि गंगा प्रसाद ने कहा कि यह निर्णय शिक्षकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से प्रारंभिक शिक्षक एसीपी और एमएसीपी की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बावजूद शिक्षकों को उचित वित्तीय लाभ नहीं मिल रहा है। संघ ने सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक संगठन सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के हजारों प्रारंभिक शिक्षकों में असंतोष का माहौल है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों पर पुनर्विचार करती है या फिर यह मामला आंदोलन और अदालत की अगली लड़ाई तक पहुंचता है।