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ऊधम सिंह नगर में एसटीएफ का बड़ा एक्शन: नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़,अवैध शराब का काला कारोबार भी उजागर

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 19, 2026 08:07 AM
Major STF action in Udham Singh Nagar: Spurious medicine factory busted; illicit liquor racket also exposed.

रुद्रपुर।  उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और समानांतर अवैध साम्राज्य चलाने वाले माफियाओं के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। एसटीएफ कुमाऊं यूनिट और औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यहाँ आयुर्वेदिक और फूड लाइसेंस की आड़ में देश की नामचीन और प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर धड़ल्ले से नकली एलोपैथिक दवाइयां बनाई जा रही थीं। इतना ही नहीं, इसी ठिकाने से उत्तराखंड आबकारी विभाग के जाली होलोग्राम का इस्तेमाल कर अवैध अंग्रेजी शराब का काला कारोबार भी चलाया जा रहा था। एसटीएफ ने मौके से लाखों रुपये मूल्य की नकली दवाइयां, हाईटेक पैकेजिंग मशीनें और भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के कुशल निर्देशन में 18 जुलाई की शाम को बाजपुर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 'कोविल बायोटेक' नामक फैक्ट्री पर अचानक छापा मारा गया। अचानक हुई इस घेराबंदी से फैक्ट्री में हड़कंप मच गया। एसटीएफ ने मौके से मुख्य ऑपरेटर धीरेंद्र (पुत्र ब्रहम सिंह, निवासी बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती तफ्तीश और पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि आरोपी के पास एलोपैथिक दवाइयों के निर्माण का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। वह केवल सरकारी आंखों में धूल झोंकने के लिए फूड और आयुर्वेदिक लाइसेंस का बोर्ड लगाकर भीतर मौत का सामान (नकली दवाइयां) तैयार कर रहा था। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि यह सिंडिकेट इंसानी जिंदगी के लिए बेहद जरूरी और रोजाना इस्तेमाल होने वाली एलोपैथिक दवाओं की हूबहू नकल तैयार कर रहा था। बरामद की गई दवाओं में मुख्य रूप से जीवाणु संक्रमण रोकने वाली एंटीबायोटिक दवाइयां,पेट की गैस और एसिडिटी के लिए एंटासिड, नसों का दर्द, बदन दर्द और सूजन निवारक गोलियां,प्रोस्टेट संबंधी गंभीर बीमारियों की दवाइयां,कैल्शियम, विटामिन और खून बढ़ाने वाले (रक्तवर्धक) सिरप शामिल हैं। बरामदगी का आंकड़ा: पुलिस ने फैक्ट्री और उसके एनएच-74 स्थित गुप्त गोदाम से लगभग 1 लाख नकली टैबलेट और 15 हजार सिरप की बोतलें बरामद की हैं। यदि ये बाजार में सप्लाई हो जातीं, तो हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। गिरफ्तार आरोपी धीरेंद्र ने कबूल किया कि वह केवल नकली दवाइयों तक सीमित नहीं था। वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर हरियाणा से भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब मंगाता था। इसके बाद उत्तराखंड में उसकी तस्करी और खपाई के लिए बकायदा उत्तराखंड आबकारी विभाग के नकली होलोग्राम, सील, ब्रांडेड कंपनियों के रैपर, ढक्कन और हजारों खाली बोतलें इसी फैक्ट्री में रखी गई थीं, जिन्हें एसटीएफ ने जब्त कर लिया है। इसके अतिरिक्त, फैक्ट्री से दवा और सिरप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बड़े-बड़े एसएस टैंक, ऑटोमैटिक फिलिंग मशीन, सीलिंग मशीन और लेबलिंग मशीनें भी जब्त की गई हैं। इस महाजाल के उजागर होने के बाद थाना बाजपुर में आरोपी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। वहीं, अवैध शराब और जाली होलोग्राम की बरामदगी के मामले में उत्तराखंड आबकारी अधिनियम के तहत अलग से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ के आला अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल इस सिंडिकेट के पूरे सप्लाई नेटवर्क, दवाइयों की खेप कहां-कहां भेजी गई और इसमें शामिल अन्य मास्टरमाइंड्स का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।


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