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नैनीताल के ऐतिहासिक बोट हाउस क्लब में बड़ा घमासान: कथित अनियमितताओं और फर्जी सदस्यता पर गरमाया मामला,पूर्व पदाधिकारियों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान

editor
  • Tapas Vishwas
  • November 05, 2026 12:11 PM
Major turmoil at Nainital’s historic Boat House Club: Controversy intensifies over alleged irregularities and fraudulent memberships; former office-bearers announce a boycott of the elections.

नैनीताल। उत्तराखंड के मुकुट कहे जाने वाले सरोवर नगरी नैनीताल के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित 'बोट हाउस क्लब' की साख एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। क्लब के पूर्व प्रबंधन कार्यकाल के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई कथित अनियमितताओं के खिलाफ असंतोष अब सतह पर आ गया है। क्लब के प्रमुख पूर्व सदस्यों और पदाधिकारियों पंकज जायसवाल, शादाब अहमद और बलजीत सिंह बंटी समेत कई अन्य दिग्गजों ने एक हाई-प्रोफाइल प्रेस वार्ता कर पूर्व प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली पर तीखे हमले किए हैं और कुमाऊं मंडल आयुक्त सह बोट हाउस क्लब के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

सरोवर नगरी नैनीताल के प्रतिष्ठित बोट हाउस क्लब में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्लब की पूर्व प्रबंधन समिति के कार्यकाल में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाते हुए पूर्व पदाधिकारियों और सदस्यों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब विरोध कर रहे सदस्यों ने आगामी क्लब चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। सदस्यों ने साफ किया है कि जब तक कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक चुनाव प्रक्रिया में उनकी भागीदारी का कोई औचित्य नहीं है। इस संबंध में क्लब के पूर्व डायरेक्टर पंकज जायसवाल, शादाब अहमद, बलजीत सिंह बंटी समेत अन्य सदस्यों ने प्रेस वार्ता कर पूर्व प्रबंधन समिति पर गंभीर आरोप लगाए। सदस्यों ने कुमाऊं मंडल आयुक्त एवं बोट हाउस क्लब के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। प्रेस वार्ता में सदस्यों ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष की प्रबंधन समिति ने अपने कार्यकाल के दौरान मनमाने तरीके से कई निर्णय लिए। क्लब के निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए निर्धारित सदस्यता शुल्क से कम धनराशि लेकर कुछ अपात्र व्यक्तियों को सदस्यता प्रदान किए जाने का आरोप भी लगाया गया। विरोध कर रहे सदस्यों का कहना है कि यदि निर्धारित नियमों को दरकिनार कर सदस्यता दी गई है तो यह क्लब की पारदर्शिता और संस्थागत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि बोट हाउस क्लब की अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्रतिष्ठा रही है। ऐसे में क्लब के संचालन में नियमों की अनदेखी और कथित अनियमितताओं से पुराने सदस्यों के अधिकारों तथा क्लब की गरिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ज्ञापन के माध्यम से सदस्यों ने मांग की है कि पूर्व प्रबंधन समिति के पूरे कार्यकाल में लिए गए निर्णयों, विशेषकर सदस्यता आवंटन और शुल्क से संबंधित मामलों की जांच कराई जाए। यदि जांच में पूर्व पदाधिकारी या समिति के सदस्य दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे लोगों को भविष्य में क्लब का चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने और नियमानुसार ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठाई गई है। विरोध कर रहे सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले कथित अनियमितताओं की जांच और आवश्यक कार्रवाई पूरी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में चुनाव की वैधता को लेकर कोई विवाद खड़ा न हो। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि बिना जांच और जवाबदेही तय किए चुनाव कराने से क्लब के भीतर असंतोष और बढ़ सकता है। फिलहाल पूर्व पदाधिकारियों और सदस्यों के इस विरोध ने बोट हाउस क्लब की आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें कुमाऊं मंडल आयुक्त और क्लब अध्यक्ष के रुख पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पूर्व प्रबंधन समिति का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
 


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