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वैश्विक तेल बाजार में बड़ा हड़कंप: रूसी तेल खरीदने वाले देशों को अमेरिका का नया 'अल्टीमेटम'

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 03, 2026 09:06 AM
Major Turmoil in the Global Oil Market: US Issues New 'Ultimatum' to Countries Buying Russian Oil

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलकों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहे भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए आने वाले दिन मुश्किलों भरे हो सकते हैं। अमेरिका ने संकेत दे दिए हैं कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रतिबंधों से दी गई ढील या छूट को अब जल्द ही पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है। इस नए घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और कूटनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर होने की संभावना तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सीनेट की शक्तिशाली 'विदेश संबंध समिति' के समक्ष एक गवाही के दौरान इस नए फरमान के सीधे संकेत दिए। रूबियो ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका इस छूट को जल्द से जल्द और पूरी तरह से समाप्त करना चाहता है। उन्होंने अमेरिकी रुख को साफ करते हुए कहा, "रूस के तेल क्षेत्र पर कड़े और सख्त प्रतिबंध लगाना अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति का अहम हिस्सा रहा है, और हम इस पर कायम हैं।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस नीतिगत बदलाव और छूट को खत्म करने की समयसीमा पर अंतिम मुहर अमेरिकी वित्त विभाग ही लगाएगा। यदि वाशिंगटन इस छूट को आधिकारिक तौर पर समाप्त करता है, तो इसका सबसे सीधा और बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू बाजार में महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए रूस से भारी मात्रा में सस्ते कच्चे तेल का आयात करता रहा है। अमेरिका के इस कड़े रुख के बाद अब भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम आने वाले दिनों में पश्चिम और एशियाई देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी वित्त विभाग के अंतिम फैसले और इस पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किए बिना अमेरिका इस फैसले को कैसे लागू करता है।


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