उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:कब्रिस्तान में शव दफनाने पर लगी रोक हटी, कोर्ट ने जिलाधिकारी को बोर्ड हटाने के दिए सख्त निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के मोरोवाला स्थित कब्रिस्तान में शवों को दफनाने पर स्थानीय कमेटी द्वारा लगाई गई रोक को पूरी तरह से हटा दिया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देहरादून के जिलाधिकारी (डीएम) को सख्त निर्देश दिए हैं कि कब्रिस्तान से कमेटी द्वारा लगाए गए विवादित बोर्ड को तुरंत हटाया जाए। साथ ही प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में वहां किसी भी नागरिक के शव को दफनाने से न रोका जा सके। न्यायालय के इस आदेश के बाद मोरोवाला क्षेत्र में चल रहा यह संवेदनशील विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है।
मामले के अनुसार, देहरादून निवासी अख्तर हुसैन ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि मोरोवाला के कब्रिस्तान का प्रबंधन देखने वाली स्थानीय कमेटी ने मनमाने ढंग से एक नियम बना दिया था, जिसके तहत कथित रूप से 'बाहरी लोगों' के शवों को वहां दफनाने पर रोक लगा दी गई थी। कमेटी ने इस संबंध में बकायदा कब्रिस्तान परिसर में एक बोर्ड भी टांग दिया था। याचिकाकर्ता अख्तर हुसैन का तर्क था कि वे और उनका परिवार कई दशकों से देहरादून में ही रह रहे हैं। उनके पूर्वजों को भी इसी मोरोवाला कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ऐसे में किसी निजी या स्थानीय कमेटी द्वारा अचानक बोर्ड लगाकर शव दफनाने पर रोक लगाना पूरी तरह से अवैध है। याचिका में साफ कहा गया कि कमेटी का यह कृत्य भारतीय संविधान द्वारा देश के हर नागरिक को दिए गए मौलिक और गरिमापूर्ण जीवन व अंतिम संस्कार के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कमेटी की इस मनमानी पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म और परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अब देहरादून के जिलाधिकारी को इस आदेश का शत-प्रतिशत पालन करवाने और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने की सीधी जिम्मेदारी सौंपी है। स्थानीय नागरिकों ने कोर्ट के इस न्यायसंगत फैसले का स्वागत किया है।