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मानव तस्करी पर बड़ा फैसला: नाबालिग बच्चियों की तस्करी के दोषी मां-बेटे को उम्रकैद, बिहार में पहली बार मिली ऐसी सजा

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 13, 2026 10:07 AM
Major verdict on human trafficking: Mother and son convicted of trafficking minor girls sentenced to life imprisonment; first such sentence in Bihar.

बगहा। मानव तस्करी के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए बगहा की अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग बच्चियों की तस्करी के मामले में दोषी पाए गए मां-बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले को बिहार में मानव तस्करी के मामले में पहली बार सुनाई गई उम्रकैद की सजा माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय को मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी न्यायिक पहल और कड़ा संदेश माना जा रहा है। बगहा जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने नौरंगिया थाना कांड संख्या 05/2026 में पश्चिम बंगाल निवासी नियोति देवी और उसके पुत्र नागेश भुइयां को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि अर्थदंड जमा नहीं किया जाता है तो दोनों को तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को मानव व्यापार निरोधक इकाई को गुप्त सूचना मिली थी कि एक महिला और एक युवक तीन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर पश्चिम बंगाल ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही नौरंगिया थाना पुलिस और मानव व्यापार निरोधक इकाई ने संयुक्त अभियान चलाया। हल्दिया चट्टी के पास घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को तीनों बच्चियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ और जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपियों की योजना बच्चियों को पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचने की थी। पुलिस ने उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और बगहा से आसनसोल तक के रेलवे टिकट भी बरामद किए, जिन्हें मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत की गई। 22 जून से गवाहों की गवाही शुरू हुई और महज 24 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर ली गई। 9 जुलाई को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि 13 जुलाई को सजा का ऐलान किया गया। अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह साबित किया कि तीनों बच्चियां नाबालिग थीं और उन्हें मानव तस्करी के उद्देश्य से बिहार से पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र भारती ने बताया कि अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि मानव तस्करी केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 के तहत प्रत्येक नागरिक को प्राप्त जीवन, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार पर सीधा हमला है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143(5) के तहत दोनों दोषियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। अधिवक्ता जितेंद्र भारती ने कहा कि यह बिहार का पहला मामला है, जिसमें मानव तस्करी के अपराध में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में स्पीडी ट्रायल के जरिए फैसला आना भी न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाता है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले को मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अपराधियों में कानून का भय बढ़ेगा, बल्कि नाबालिगों की तस्करी जैसे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि मानव तस्करी जैसे संगीन अपराधों में दोषियों के लिए कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।


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