झारखंड में वोटर वेरिफिकेशन का बड़ा अभियान: गणना प्रपत्र भरते समय न करें लापरवाही, छोटी गलती भी बढ़ा सकती है परेशानी
रांची। झारखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान तेज गति से चल रहा है। इस अभियान के तहत राज्य के 2 करोड़ 64 लाख 63 हजार 236 मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है। इसके लिए ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) प्रत्येक मतदाता से संपर्क कर गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे इस प्रपत्र को पूरी सावधानी से भरें, क्योंकि छोटी-सी गलती भी बाद में दस्तावेजों की जांच या सुधार की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी गणना प्रपत्र को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। प्रत्येक मतदाता के प्रपत्र के शीर्ष पर उसका क्यूआर कोड और फोटो पहले से अंकित रहेगा। इसके अलावा मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, पता, मतदाता क्रम संख्या, भाग संख्या, मतदान केंद्र, विधानसभा अथवा संसदीय क्षेत्र और राज्य का नाम पहले से दर्ज रहेगा। इससे पहचान संबंधी त्रुटियों की संभावना कम होगी। हालांकि इसके बाद की जानकारी मतदाता को स्वयं भरनी होगी। इसमें जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, आधार संख्या (वैकल्पिक), पिता या अभिभावक का नाम, उनकी ईपीआईसी संख्या, माता का नाम और उनकी ईपीआईसी संख्या, पति या पत्नी का नाम तथा उनकी ईपीआईसी संख्या जैसी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। सभी विवरण भरने के बाद मतदाता को घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। बीएलओ भी प्रपत्र पर हस्ताक्षर करेंगे और आवेदन प्राप्ति की रसीद मतदाता को देंगे, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है। निर्वाचन आयोग के अनुसार यह अभियान 30 जून से 29 जुलाई तक चलेगा। अब तक राज्यभर में लगभग 45 लाख गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जबकि करीब 1.5 लाख मतदाता अपने प्रपत्र भरकर जमा भी कर चुके हैं। इस विशाल अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी राज्य के 29,571 बीएलओ को सौंपी गई है, जो घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। दस्तावेज जमा करने के नियम भी मतदाता की जन्मतिथि के आधार पर तय किए गए हैं। यदि किसी मतदाता का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ है, तो उसे केवल अपना दस्तावेज देना होगा। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, उन्हें अपने साथ माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज भी देना होगा। वहीं 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाले मतदाताओं को अपने दस्तावेज के साथ माता और पिता दोनों के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। निर्वाचन आयोग ने कई प्रकार के दस्तावेजों को मान्य किया है। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक या अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, सरकारी कर्मचारियों या पेंशनभोगियों के पहचान पत्र एवं पीपीओ, सरकारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र सहित अन्य वैध सरकारी दस्तावेज शामिल हैं। आधार संख्या देना पूरी तरह वैकल्पिक रखा गया है और इसके संबंध में आयोग के अलग दिशा-निर्देश लागू होंगे। विशेष परिस्थितियों के लिए भी आयोग ने अलग व्यवस्था की है। यदि किसी मतदाता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में झारखंड के बजाय किसी अन्य राज्य में दर्ज था, तो उसे संबंधित मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति या आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना होगा। वहीं पैरेंटल मैपिंग से बाहर नए मतदाताओं को शपथ पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी गणना प्रपत्र में कोई त्रुटि पाई जाती है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज या जानकारी मांगी जाएगी और जरूरत पड़ने पर बीएलओ के माध्यम से नया गणना प्रपत्र भरकर सुधार कराया जा सकेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार ने कहा कि गणना प्रपत्रों की जांच कई स्तरों पर होगी। पहले बीएलओ और सुपरवाइजर सत्यापन करेंगे, इसके बाद सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन पदाधिकारी तथा अंत में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारी भी दस्तावेजों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे समय सीमा के भीतर सही जानकारी के साथ प्रपत्र भरें, हस्ताक्षर अवश्य करें और बीएलओ से आवेदन प्राप्ति की रसीद लेना न भूलें। इससे भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सकेगा।