मकर संक्रांति 2022:दो बार मनाई जायेगी मकर संक्रांति,शुभ मुहूर्त से लेकर खिचड़ी के महत्व को जानिये लिंक पर क्लिक कर के
मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धालु इस बार दो दिन मना सकेंगे। 14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात आठ बजकर 49 मिनट पर हो रहा है। इसका पुण्यकाल अगले दिन (15 जनवरी) को दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। ऐसे में मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी दोनों की दिन मनाई जा सकेगी।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति के समय रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का योग है। संक्रांति के समय ब्रह्म योग और बालव करण है। यह संक्रांति चंद्रमा के वृषभ राशि में घटित हो रहा है। इस दिन मित्र नामक महाऔदायिक योग भी है।
हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस त्यौहार को मनाये जाने के पीछे अलग-अलग कहानियां जुड़ी हुई हैं. माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर जाते हैं. तो कुछ लोग ये भी मानते हैं कि शनि देव को मकर राशि का स्वामी माना जाता है इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है.
माना जाता है कि जब अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था तब युद्ध के दौरान नाथ योगियों को खाना बनाने तक का भी समय नहीं मिलता था. ऐसे में वे कई-कई दिनों तक भूखे ही युद्ध करते रहते थे. इससे उनके शरीर की शक्ति भी काफी कम होने लगी थी और वे युद्ध में भी ठीक से प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे. इस समस्या का हल बाबा गोरखनाथ ने दिया और योगियों को ऐसा व्यंजन पकाने को कहा जिसमें दाल, चावल और सब्जियां सब एक साथ ही पका ली जायें. इस पकवान को बाबा ने खिचड़ी का नाम दिया था.इसी वजह से गोरखपुर स्थित गोरखनाथ बाबा के मंदिर में मकर संक्रांति के पर्व पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. साथ ही इस अवसर पर खिचड़ी का प्रसाद बनाकर पहले गोरखनाथ बाबा को भोग लगाया जाता है और फिर सभी लोगों में वितरित किया जाता है.