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हल्द्वानी में साइबर ठगी का महाजाल: ₹1 करोड़ बीमा रिफंड के झांसे में बुजुर्ग ने गंवाए ₹72.33 लाख, 9 महीने में किए 84 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 19, 2026 08:07 AM
Massive cyber fraud web in Haldwani: Elderly man loses ₹72.33 lakh after being lured by a ₹1 crore insurance refund scheme; made 84 online transactions over 9 months.

हल्द्वानी।  उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी से साइबर अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। पुरानी बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम और बोनस समेत लगभग ₹1 करोड़ वापस दिलाने का झांसा देकर शातिर ठगों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी ठगी का शिकार बनाया। ठगों के बुने जाल में फंसकर पीड़ित ने पिछले 9 महीनों के भीतर एक-दो बार नहीं, बल्कि कुल 84 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए अपनी गाढ़ी कमाई के 72 लाख 33 हजार 600 रुपये गंवा दिए। ठगों ने खुद को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का बड़ा अधिकारी बताकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, कुमाऊं रेंज रुद्रपुर ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी है।

हल्द्वानी निवासी पीड़ित सुरेंद्र सिंह (परिवर्तित नाम) ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न बीमा कंपनियों से पांच बीमा पॉलिसियां खरीदी थीं। उन्होंने पहली किस्त के रूप में करीब 80 हजार रुपये जमा भी किए थे। लेकिन बाद में किन्हीं आर्थिक तंगियों और पारिवारिक कारणों से वे आगे का प्रीमियम जमा नहीं कर सके और पॉलिसियां लैप्स हो गईं। पीड़ित के अनुसार, करीब एक साल बाद जुलाई 2025 से उनके मोबाइल पर अलग-अलग अज्ञात नंबरों से लगातार फोन आने शुरू हुए। कॉल करने वाले ने अपना नाम संदीप शर्मा बताया और खुद को एनपीसीआई में असिस्टेंट मैनेजर एवं फंड ट्रांसफर मैनेजर के रूप में पेश किया। उसने बुजुर्ग को झांसा दिया कि उनकी पांचों बंद पड़ी पॉलिसियों का प्रीमियम और भारी-भरकम बोनस मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये का रिफंड सरकारी फंड में रुका हुआ है, जिसे वह कुछ विभागीय प्रक्रियाओं के बाद सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करवा सकता है। ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए उनसे पहचान संबंधी दस्तावेज [जैसे- पहचान पत्र, पैन कार्ड और फोटो] व्हाट्सएप पर मंगवाए। इसके बाद रिफंड की रकम जारी कराने के नाम पर ठगी का अंतहीन सिलसिला शुरू हुआ। शातिरों ने अलग-अलग किस्तों में प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज,कैपिटल गेन टैक्स और जीएसटी,आरबीआई प्रोसेसिंग चार्ज, इंटर-स्टेट (एक राज्य से दूसरे राज्य) भुगतान ट्रांसफर शुल्क, सहित कई फर्जी टैक्स और पेनाल्टी बताकर बार-बार मोटी रकम की मांग की। ठग हर बार व्हाट्सएप के माध्यम से नए-नए बैंक खातों की जानकारी भेजते रहे और रिफंड की आस में बुजुर्ग उनके निर्देशों के मुताबिक रकम ट्रांसफर करते रहे। सुरेंद्र सिंह ने 14 जुलाई 2025 से लेकर 6 मई 2026 के बीच अपने बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और एक्सिस बैंक के खातों से कुल 84 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए। इस तरह उन्होंने कुल ₹72,33,600 ठगों के खातों में डाल दिए। ठग लगातार उन्हें आश्वासन देते रहे कि सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही एक करोड़ रुपये उनके खाते में क्रेडिट हो जाएंगे। हालांकि, जब लंबा समय बीतने के बाद भी फूटी कौड़ी नहीं मिली और ठगों के सभी मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गए, तब जाकर पीड़ित को ठगे जाने का अहसास हुआ। धोखाधड़ी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में गुहार लगाई। उन्होंने पुलिस को अपने तीनों बैंक खातों के स्टेटमेंट, ठगों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट और उनके द्वारा भेजे गए फर्जी दस्तावेजों के डिजिटल सबूत सौंपे हैं। कुमाऊं रेंज साइबर पुलिस के अनुसार, अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीम बैंक खातों के ट्रांजैक्शन रूट, व्हाट्सएप चैट के आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबरों की लोकेशन के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर पुलिस की अपील: "बीमा पॉलिसी रिफंड, भारी-भरकम लॉटरी, अनधिकृत निवेश या किसी भी प्रकार के रातों-रात अमीर बनने के लालच में बिल्कुल न आएं। कोई भी सरकारी या वित्तीय संस्था फोन पर गुप्त दस्तावेज या पैसे की मांग नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल या गतिविधि की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।


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