• Home
  • News
  • Massive Glacier Breaks Off into Kanchan Ganga Near Badrinath Dham; No Damage Reported, Administration on Alert; Snow Melting in the Mountains Due to Intense Sunlight.

बदरीनाथ धाम के पास कंचनगंगा में टूटा विशाल ग्लेशियर,कोई नुकसान नहीं, प्रशासन अलर्ट,तेज धूप के कारण पहाड़ों पर पिघल रही बर्फ

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 24, 2026 08:05 AM
Massive Glacier Breaks Off into Kanchan Ganga Near Badrinath Dham; No Damage Reported, Administration on Alert; Snow Melting in the Mountains Due to Intense Sunlight.

चमोली। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के निकट कंचनगंगा क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर (हिमखंड) टूटने की घटना हुई है। ग्लेशियर टूटने का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बर्फ का एक बहुत बड़ा हिस्सा तेजी से नीचे की ओर खिसकता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, राहत और संतोष की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और पुलिस ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए स्थिति पर नजर बना ली है। अधिकारियों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस मौसम में ऐसी घटनाएं सामान्य हैं और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है।

भू-वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पर्वतीय अंचलों में मौसम के बदलते मिजाज के कारण ऐसी हलचलें होती हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिन के समय तेज धूप खिलने से तापमान बढ़ता है, जबकि रात के वक्त पारा तेजी से नीचे गिर जाता है। तापमान में आने वाले इसी उतार-चढ़ाव के कारण ग्लेशियरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती हैं और बर्फ के विशाल हिस्से टूटकर नीचे की तरफ खिसकने लगते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार भी तेज हो जाती है। चमोली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरजीत सिंह पंवार ने ग्लेशियर टूटने की पुष्टि करते हुए जनता को आश्वस्त किया है। उन्होंने बताया, "कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। यह एक प्राकृतिक और वार्षिक प्रक्रिया है। हर साल यह ग्लेशियर धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता है और आगे चलकर कंचनगंगा के मैदानी हिस्से में आकर रुक जाता है।" प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की अपील की है। भले ही इस घटना में कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन इसे लेकर पूरी तरह सतर्क है क्योंकि चमोली जिला पूर्व में कई बड़ी और दुखद हिमस्खलन (एवलांच) की घटनाओं का गवाह रहा है। चमोली के माणा में हुए उस बड़े हादसे में कुल 54 मजदूर बर्फ के नीचे दब गए थे, जिसके बाद भारतीय सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने शून्य से नीचे के तापमान में एक बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 46 लोगों की जान बचाई थी। विगत वर्षों के इन कड़वे अनुभवों को देखते हुए ही उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन विभाग सैटेलाइट और स्थानीय इनपुट के जरिए हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रख रहा है, ताकि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।


संबंधित आलेख: