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पटना में छात्रों का भारी आक्रोश: बीएसएससी दफ्तर के मेन गेट पर जड़ा ताला, 3 साल से अटकी परीक्षाओं को लेकर आर-पार की जंग

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 14, 2026 02:07 PM
Massive student outrage in Patna: Main gate of BSSC office locked; a decisive battle over exams stalled for three years.

पटना। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) की कार्यप्रणाली से नाराज और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। विभिन्न लंबित परीक्षाओं को जल्द आयोजित कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्रों ने पटना स्थित बीएसएससी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित अभ्यर्थियों ने न सिर्फ आयोग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए आयोग के मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) पर ताला जड़ दिया। तालाबंदी के कारण काफी देर तक आयोग कार्यालय के बाहर अफरा-तफरी और भारी तनाव का माहौल बना रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सूबे के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता सौरव कुमार ने आयोग और सरकार की ढुलमुल नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग पिछले तीन वर्षों से बिहार इंटरमीडिएट (10+2), बीएसएससी सीजीएल-4 (सीजीएल-4) और बीएसओ (बीएसओ) समेत विभिन्न बड़ी भर्तियों के लिए केवल आवेदन भरवा रहा है, लेकिन परीक्षाओं की तारीखों का अता-पता नहीं है। महीनों और सालों बीत जाने के बाद भी परीक्षाएं आयोजित नहीं होने से बिहार के लाखों युवाओं का भविष्य पूरी तरह अधर में लटक गया है। छात्रों का कहना है कि लेटलतीफी के कारण उनकी उम्र सीमा खत्म हो रही है और मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने साफ किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है। छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं। बिहार इंटरमीडिएट (10+2), सीजीएल-4 और बीएसओ की रुकी हुई परीक्षाओं की तारीखों की तत्काल घोषणा की जाए। आयोग एक पारदर्शी और तय समय-सीमा वाला 'परीक्षा कैलेंडर' जारी करे ताकि छात्रों को तैयारी का सही मौका मिल सके। विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों को इन नियमित नियुक्तियों में उचित वेटेज (वरीयता) दिया जाए। तालाबंदी और भारी नारेबाजी के चलते दफ्तर के भीतर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने छात्रों को समझाने बुझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अड़े रहे। छात्र नेता सौरव कुमार ने दोटूक शब्दों में कहा, "सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। तीन साल से सिर्फ फॉर्म भरवाकर राजस्व वसूला जा रहा है, मगर परीक्षा लेने की नियत किसी की नहीं है। हमारी अपील सीधे सरकार से है कि इस समस्या का अविलंब समाधान निकाला जाए।" समाचार लिखे जाने तक छात्र अपनी मांगों को लेकर आयोग के बाहर डटे हुए थे और प्रशासनिक स्तर पर वार्ता की कोशिशें जारी थीं।
 


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