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झारखंड में महा-वोटर चेतना अभियान: 30 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ, सीईओ की बैठक में बोले दल-अपात्रों की खैर नहीं, हर पात्र बनेगा वोटर'

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 25, 2026 02:06 PM
Mega Voter Awareness Campaign in Jharkhand: BLOs to conduct door-to-door visits starting June 30; parties state at CEO's meeting—ineligible persons won't be spared, every eligible person will become a voter.

रांची। झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। राज्य में 30 जून से शुरू हो रहे मतदाताओं के 'विशेष गहन पुनरीक्षण-2026' (एसआईआर) को लेकर आयोग को झारखंड के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का पूरा साथ मिला है। गुरुवार को रांची के निर्वाचन सदन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय सर्वदलीय बैठक में यह सामंजस्य देखने को मिला। बैठक में भाजपा, कांग्रेस सहित सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद थे, जिनकी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान आयोग ने पीपीटी के माध्यम से विस्तार से किया।

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि इस विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम का एकमात्र मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी भी अयोग्य या अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो पाए। इस महा-अभियान की सफलता में सभी राजनीतिक दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चुनावी शेड्यूल (टाइमलाइन) साझा करते हुए बताया कि एसआईआर के तहत प्रशिक्षण और मुद्रण का कार्य 20 जून से 29 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके ठीक बाद 30 जून से असली ज़मीनी काम शुरू होगा, जिसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म भरने का कार्य करेंगे। सीईओ ने स्पष्ट किया कि 30 जून से शुरू होने वाले इस गणना चरण के दौरान बीएलओ प्रत्येक नागरिक के घर जाकर आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ 'इन्यूमरेशन फॉर्म' दो प्रतियों में वितरित करेंगे। इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। यदि किसी नागरिक का घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को फॉर्म इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार उस घर का चक्कर लगाना होगा। दस्तावेजों की अनिवार्यता को लेकर उन्होंने बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि वोटरों की सहूलियत के लिए 'सेल्फ' या 'पैरेंटल' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआईआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और नागरिक व सैन्य क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की गणना प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। मैपिंग के दौरान आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। बैठक के बाद कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मीडिया संयोजक किशोरनाथ शाहदेव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "बीएलए-2 और बीएलओ में कैसे बेहतर सामंजस्य बनाकर एसआईआर को पूरा किया जाए, इसकी बहुत ही शानदार जानकारी दी गई है। यह लोकतंत्र के हित में एक बड़ा कदम है। वहीं, भाजपा के सुधीर श्रीवास्तव ने चुनाव आयोग के इस पुख्ता इंतजाम पर पूरा संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "अब यह बात पूरी तरह तय है कि आयोग की इस सख्त व्यवस्था के बाद कोई कितनी भी कोशिश कर ले, कोई भी अपात्र या फर्जी व्यक्ति एसआईआर के माध्यम से वोटर नहीं बन पाएगा।


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