गया में चमत्कार: 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 4 साल के मासूम की बची जान,9 घंटे चले महा-रेस्क्यू के बाद आयुष सुरक्षित बाहर
गया। बिहार के गया जिले से एक बेहद राहत भरी और चमत्कारिक खबर सामने आई है। फतेहपुर थाना क्षेत्र के रंगु नगर गांव में गुरुवार रात एक 4 साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। इस घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने मोर्चा संभाला और पूरी रात चले 9 घंटे के सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार सुबह मासूम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मासूम की सुरक्षित वापसी के बाद परिजनों और पूरे गांव में जश्न का माहौल है। प्रशासन की सूझबूझ और तत्परता से एक मासूम को नया जीवन मिला है।
बच्चे के पिता दिनेश मांझी ने बताया कि यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना गुरुवार रात करीब 8 बजे की है। उनका 4 वर्षीय बेटा आयुष घर के बाहर खेल रहा था, तभी वह नल-जल योजना के तहत किए गए एक खुले बोरवेल में समा गया। यह बोरिंग कुल 300 फीट गहरी थी, जिसमें ऊपरी 50 फीट तक 12 इंच की चौड़ाई थी। मासूम आयुष बोरवेल के भीतर करीब 25 से 30 फीट की गहराई पर जाकर अटक गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पाइप के जरिए बोरवेल के अंदर लगातार ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की गई, जिससे बच्चे की सांसें चलती रहीं। फतेहपुर सीओ अमिता सिन्हा और प्रखंड विकास पदाधिकारी शशि भूषण साहू की मौजूदगी में एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू की कमान संभाली। तुरंत मौके पर जेसीबी मशीनें मंगवाई गईं और बोरवेल के समानांतर एक बड़ा गड्ढा खोदने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया। पूरी रात एनडीआरएफ के जवान और स्थानीय लोग बिना पलक झपकाए रेस्क्यू में जुटे रहे। मिट्टी धंसने के खतरे के बीच बेहद सावधानी से सुबह करीब 3 बजे टीम ने बच्चे तक पहुंचने में सफलता पाई और उसे सकुशल बाहर खींच लिया। सीओ अमिता सिन्हा ने बताया कि बोरवेल से निकालने के तुरंत बाद आयुष को फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी गहन जांच की गई है और वह पूरी तरह से स्वस्थ व सुरक्षित है। इस घटना ने एक बार फिर खुले बोरवेलों को लेकर सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी और एनडीआरएफ के हौसले ने रंगु नगर गांव में एक बड़ा हादसा होने से रोक लिया।