मिशन उत्तराखंड: चुनाव से पहले देवभूमि में भाजपा का 'महामंथन',चारधाम यात्रा के बहाने सियासी जमीन नापेंगे बाहरी दिग्गज
देहरादून। पांच राज्यों के चुनावी रण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा ध्यान उत्तराखंड पर केंद्रित कर दिया है। राज्य में लगातार तीसरी बार 'कमल' खिलाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने अभी से बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार रणनीति में 'चारधाम यात्रा' और 'सियासत' का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। पार्टी के कई कद्दावर नेता और बाहरी राज्यों के दिग्गज चारधाम दर्शन के बहाने उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, जिनका असली मकसद प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को भांपना है।
भाजपा की रणनीति के तहत गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे संगठनात्मक रूप से मजबूत राज्यों के पदाधिकारियों की उत्तराखंड में आहट शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन राज्यों के सांसद, विधायक और अनुभवी कार्यकर्ता जल्द ही उत्तराखंड के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में डेरा डालेंगे। ये नेता न केवल बूथ मैनेजमेंट को धार देंगे, बल्कि संगठन के काम करने के अलग तरीकों का लाभ भी यहां की टीम को देंगे। केंद्रीय नेतृत्व इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। राज्य स्तर पर हुए दो सर्वे के अलावा, अब केंद्रीय स्तर से एक अलग गोपनीय सर्वे कराया जा रहा है। इसमें वर्तमान विधायकों की परफॉर्मेंस और जनता के बीच उनकी छवि को बारीकी से परखा जा रहा है। इसी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर आगामी टिकट वितरण की दिशा तय होगी। उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं की छवि 'बूथ मैनेजमेंट' में काफी मजबूत मानी जाती है। हाल ही में हुए चुनाव में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत समेत युवा मोर्चा के कई पदाधिकारियों ने दूसरे राज्यों में महीनों तक काम किया है। अब उसी तर्ज पर राजस्थान और अन्य राज्यों के विधायकों का दल उत्तराखंड में सक्रिय होगा। वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा भाजपा के लिए फीडबैक जुटाने का बड़ा माध्यम बन रही है। पार्टी के कई बाहरी दिग्गज यात्रा के लिए पहुंच रहे हैं। ये नेता यात्रा मार्ग के जिलों और कस्बों में रुककर स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस 'साइलेंट सर्वे' से प्राप्त जानकारी सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंचाई जा रही है। कुल मिलाकर भाजपा ने उत्तराखंड चुनाव के लिए अपनी किलेबंदी शुरू कर दी है। बाहरी नेताओं की सक्रियता और हाईटेक सर्वे ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।