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उत्तराखण्ड में मानसून का कहर जारी! चमोली-रुद्रप्रयाग से नैनीताल तक सड़कें बंद, कर्णप्रयाग में मलबे ने मचाई तबाही, मसूरी में पहाड़ी दरकने से दहशत

editor
  • Awaaz Desk
  • August 30, 2026 08:08 AM
Monsoon havoc continues in Uttarakhand! Roads closed from Chamoli-Rudraprayag to Nainital; debris wreaks havoc in Karnaprayag; panic in Mussoorie following a hillside collapse.

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय होता नजर आ रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में देर रात से हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजधानी देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं, जबकि जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें बंद हो गई हैं। प्रदेश में फिलहाल 86 मोटर मार्ग अवरुद्ध बताए जा रहे हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से कई गांवों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक असर पहाड़ी जिलों में देखने को मिल रहा है। चमोली में 18 और रुद्रप्रयाग में 13 मोटर मार्ग बंद हैं। पिथौरागढ़ में टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग कुलागाड़ के पास बाधित हो गया है। इसके साथ ही कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी तीन स्थानों पर बंद है। सड़क मार्ग बाधित होने से चीन सीमा से संपर्क प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनों और कर्मचारियों को मौके पर भेजकर लगातार काम कर रहे हैं। देहरादून में भी भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मालदेवता से सोंदना गांव होते हुए निर्माणाधीन सॉन्ग बांध साइट तक जाने वाली सड़क कुंड गांव के पास अत्यधिक बारिश के कारण बह गई। सड़क बहने से हिंलासवाली, सौंदना, तौलियाकाटल, रगड़ गांव, घुड़सवाल गांव, शेरा, पसनी, कुंड और हल्द्वाड़ी समेत कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। वहीं जैंतानवाला की ग्राम सभा दयानगर में भारी बारिश और टोंस नदी के बढ़े जलस्तर ने खतरा बढ़ा दिया है। यहां सुनीता उपाध्याय का मकान क्षतिग्रस्त होने की कगार पर पहुंच गया है। लगातार बारिश के कारण स्थानीय लोगों में भी दहशत का माहौल है।

नैनीताल-काठगोदाम मार्ग पर पहाड़ी दरकी, मलबे से हाईवे बंद
नैनीताल-काठगोदाम मार्ग पर भी रविवार सुबह अचानक पहाड़ी दरकने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। दो गांव के समीप सुबह करीब साढ़े सात बजे पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक चटक गया और देखते ही देखते बड़े-बड़े बोल्डर और भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा। मलबा आने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई यात्री और स्थानीय लोग मार्ग में फंस गए। गनीमत रही कि जिस समय भूस्खलन हुआ, उस वक्त सड़क से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलने के बाद एनएचएआई की टीम जेसीबी और अन्य मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। सड़क से बोल्डर और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की गई है।

कर्णप्रयाग में ढाई घंटे की बारिश से मचा हड़कंप
चमोली जिले के कर्णप्रयाग में रविवार सुबह करीब ढाई घंटे तक हुई तेज बारिश ने भी जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह लगभग साढ़े छह बजे सुभाषनगर क्षेत्र में बारिश के साथ अचानक भारी मलबा और पेड़ सड़क पर आ गिरे। मलबे की चपेट में आने से कई आवासीय मकानों पर खतरा मंडराने लगा। इस दौरान एक दुकानदार मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया। सड़क किनारे खड़े कई दोपहिया वाहन भी मलबे में दब गए। भारी मलबे के कारण सड़क बंद हो गई, जिससे कुमाऊं और पिंडर क्षेत्र की ओर जाने वाला यातायात प्रभावित हुआ। फिलहाल वाहनों को अपर बाजार के रास्ते डायवर्ट किया गया है। भारी बारिश के कारण बिजली की लाइन को भी नुकसान पहुंचा है। इससे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। संबंधित विभागों की ओर से सड़क से मलबा हटाने और स्थिति सामान्य करने का काम जारी है।

29 अगस्त से 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मानसून की सक्रियता और बढ़ सकती है। केंद्र ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अगले 48 घंटे में और स्पष्ट होकर आगे बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा मानसून टर्फ अमृतसर से इस सिस्टम तक फैली हुई है, जबकि उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 30 अगस्त को देहरादून, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में भारी बारिश के साथ तीव्र से अति तीव्र दौर की बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं 31 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। मौसम विभाग ने 1 और 2 सितंबर को भी देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में भारी बारिश की संभावना जताई है।

मसूरी में फिर दरका पहाड़, पानी वाले बैंड पर मकानों को खतरा
पहाड़ों की रानी मसूरी में देर रात से लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर परेशानी बढ़ा दी है। मसूरी-देहरादून मार्ग के पानी वाले बैंड क्षेत्र में बारिश के बीच पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भूस्खलन के कारण नीचे आ गया। भूस्खलन का मलबा आसपास फैल गया है, जबकि पहाड़ी के ऊपर बने मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार पानी वाला बैंड पहले से ही भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। 2025 की आपदा में भी यहां भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद 2026 में भी बारिश के दौरान कई बार भूस्खलन और सड़क को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा भूस्खलन के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी और कमजोर हो सकती है, जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराने और मकानों व सड़क की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। लगातार बारिश के बीच पानी वाले बैंड की यह तस्वीर एक बार फिर बता रही है कि पहाड़ी अभी भी बेहद संवेदनशील स्थिति में है।


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