झारखंड में मॉनसून की मूसलाधार रफ्तार: रांची-धनबाद समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, वज्रपात की चेतावनी
रांची। झारखंड में मॉनसून ने एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही लगातार बारिश के बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 48 घंटों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, 19 और 20 जुलाई को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान कई इलाकों में गरज-चमक के साथ आसमानी बिजली (वज्रपात) गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता को खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
मौसम केंद्र द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, आज (19 जुलाई) राज्य के उत्तर-पूर्वी, निकटवर्ती मध्य और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा। इसके तहत विशेष रूप से गढ़वा, पलामू, लातेहार,धनबाद, गिरिडीह, देवघर,जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वज्रपात के प्रति सचेत रहने को कहा गया है। मूसलाधार बारिश का यह सिलसिला सोमवार (20 जुलाई) को भी जारी रहने का अनुमान है। कल के लिए मौसम विभाग ने राज्य के मध्य और पश्चिमी जिलों में भारी वर्षा की आशंका जताई है। मुख्य रूप से रांची, हजारीबाग, रामगढ़ लोहरदगा, चतरा और लातेहार जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ मेघगर्जन और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में सबसे अधिक 76.8 मिलीमीटर बारिश धनबाद जिले के राजदह में रिकॉर्ड की गई, जिससे वहां के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। एक तरफ जहां बारिश का जोर है, वहीं दूसरी तरफ कुछ इलाकों में उमस और तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में सरायकेला में अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा। मौसम केंद्र के निदेशकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें। भारी बारिश और मेघगर्जन के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या असुरक्षित कच्चे मकानों के नीचे शरण लेने से बचें। किसान भाइयों को भी सलाह दी गई है कि वे खेतों में काम करते समय मौसम का मिजाज देखकर ही बाहर निकलें।