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बॉलीवुड में पसरा मातम, नहीं रहे नाना पाटेकर! कभी जेब्रा क्रॉसिंग और फिल्मों के पोस्टर रंगकर चलाया गुजारा, फिर अपनी दमदार अदाकारी से बने हिंदी-मराठी सिनेमा के सिरमौर

editor
  • Awaaz Desk
  • October 08, 2026 06:10 AM
Mourning grips Bollywood; Nana Patekar is no more! He once made ends meet by painting zebra crossings and film posters, only to later become a titan of Hindi and Marathi cinema through his powerful acting.

नई दिल्ली। हिंदी और मराठी सिनेमा के सिरमौर और अपनी जीवंत व कड़क अभिनय शैली से दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (विश्वनाथ पाटेकर) का गुरुवार, 8 अक्टूबर को गोवा में निधन हो गया। 75 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। गोवा स्थित अपने फ्लैट पर तड़के सीने में तेज दर्द उठने और गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके अचानक चले जाने की खबर से पूरा देश, बॉलीवुड इंडस्ट्री और उनके करोड़ों प्रशंसक स्तब्ध व शोकाकुल हैं।  मणिपाल अस्पताल (गोवा) के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर और अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रात 2ः30 बजे, नाना पाटेकर ने अपने एक दोस्त को मैसेज भेजकर तबीयत ठीक न होने और बेचैनी महसूस होने की बात कही थी। रात का समय होने के कारण दोस्त तुरंत मैसेज नहीं देख सका। बाद में फोन करने पर जब कोई सही प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो दोस्त सुबह करीब 4 बजे उनके गोवा स्थित घर पहुंचा। उस समय नाना को काफी पसीना आ रहा था और उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। उस समय घर पर परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, केवल केयरटेकर और दोस्त थे। हालत बिगड़ने पर अस्पताल की एम्बुलेंस बुलाई गई। इमरजेंसी मेडिकल टीम जब घर पहुंची तो नाना पूरी तरह से बेहोश मिले। टीम ने तुरंत फ्लैट पर ही कार्डियक मसाज देना शुरू किया। सुबह करीब 4ः20 से 4ः30 बजे के बीच उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने करीब 45 मिनट से 1 घंटे तक लगातार सीपीआर देकर उन्हें पुनर्जीवित करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंततः डॉक्टरों ने सुबह 5ः20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

बचपन की तंगहाली से बॉलीवुड के ‘क्रांतिवीर’ बनने का सफर
1 जनवरी 1951 को मुंबई में जन्मे विश्वनाथ (नाना) पाटेकर का शुरुआती जीवन अत्यधिक संघर्षों और तंगहाली में बीता। उनके पिता दिनकर पाटेकर टेक्सटाइल पेंटर के बिजनेस में थे। पारिवारिक बिजनेस बंद हो जाने के बाद नाना ने हिम्मत नहीं हारी और आजीविका के लिए सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने व फिल्मों के पोस्टर रंगने का काम किया। अपनी कड़ी मेहनत और बेजोड़ प्रतिभा के दम पर उन्होंने थियेटर से फिल्मों का रुख किया। उन्होंने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशीः द म्यूजिकल’, ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी कालजयी फिल्मों में अभिनय का लोहा मनवाया। उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया और वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

किसानों के मसीहा और ‘नाम फाउंडेशन’
नाना पाटेकर केवल पर्दे के नायक नहीं थे, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक महान समाजसेवी थे। बेहद सादा जीवन जीने वाले नाना पाटेकर अपनी कमाई और समय का बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों पर खर्च करते थे। पुणे के खड़कवासला स्थित अपने 27 एकड़ के फार्महाउस में वे खुद गेहूं और धान की खेती करते थे और उससे होने वाली आय को किसानों में बांट देते थे।  वर्ष 2015 में उन्होंने नाम फाउंडेशन नामक एनजीओ की स्थापना की, जिसके माध्यम से महाराष्ट्र के सूखा पीड़ित, कर्जदार और आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों की आर्थिक मदद की जाती थी। वे गरीब किसानों की बेटियों के विवाह में भी आर्थिक योगदान देते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया गहरा शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बहुत कम कलाकारों में नाना पाटेकर जैसी गहराई, अपनी अलग पहचान और खास मौजूदगी थी। उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई और ऐसे यादगार किरदार दिएए जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। 

पीछे छोड़ गए सादगी और करोड़ों की विरासत
नाना पाटेकर अपने पीछे पत्नी नीलकंती पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर को छोड़ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अपने पीछे करीब 80 करोड़ रुपये की संपत्ति (जिसमें मुंबई का 1 बीएचके फ्लैट, पुणे व गोवा के मकान और 27 एकड़ की कृषि भूमि शामिल है) छोड़ गए हैं। नाना पाटेकर आज भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी बेबाक अदाकारी, बुलंद आवाज और समाज सेवा के कार्यों के जरिए वे हमेशा देशवासियों के दिलों में अमर रहेंगे।


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